भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 81, कुल 150 में से

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हिन्द स्वराज्य ही था। उसने बादशाह के घर में कुछ बीमारी मिटाई, इसलिए उसे सिरोपाव (सिरोपा) मिला। अमीरों के पास पहुँचने वाले भी डॉक्टर ही हैं। डॉक्टरों ने हमें जड़ से हिला दिया है। डॉक्टरों से नीम-हकीम ज्यादा अच्छे, ऐसा कहने का मेरा मन होता है। इस पर हम कुछ विचार करें। [हाशिया:] यूरोप के डॉक्टर तो हद करते हैं। वे सिर्फ़ शरीर के ही गलत जतन के लिए लाखों जीवों को हर साल मारते हैं, जिंदा जीवों पर प्रयोग करते हैं। ऐसा करना किसी भी धर्म को मंजूर नहीं। हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, जरथोस्ती सब धर्म कहते हैं कि आदमी के शरीर के लिए इतने जीवों को मारने की ज़रूरत नहीं। डॉक्टरों का काम सिर्फ़ शरीर को संभालने का है, या शरीर को संभालने का भी नहीं है। उनका काम शरीर में जो रोग पैदा होते हैं उन्हें दूर करने का है। रोग क्यों होते हैं? हमारी ही ग़फ़लत से। मैं बहुत खाऊँ और मुझे बदहज्मी, अजीर्ण हो जाए, फिर मैं डॉक्टर के पास जाऊँ और वह मुझे गोली दे, गोली खाकर मैं चंगा हो जाऊँ और दुबारा खूब खाऊँ और फिर से गोली लूँ। अगर मैं गोली न लेता तो अजीर्ण की सज़ा भुगतता और फिर से बेहद नहीं खाता। डॉक्टर बीच में आया और उसने हद से ज्यादा खाने में मेरी मदद की। उससे मेरे शरीर को तो आराम हुआ, लेकिन मेरा मन कमज़ोर बना। इस तरह आख़िर मेरी यह हालत होगी कि मैं अपने मन पर जरा भी काबू न रख सकूँगा। मैंने विलास किया, मैं बीमार पड़ा, डॉक्टर ने मुझे दवा दी और मैं चंगा हुआ। क्या मैं फिर से विलास नहीं करूँगा? ज़रूर करूँगा। अगर डॉक्टर बीच में न आता तो कुदरत अपना काम करती, मेरा मन मजबूत बनता और अन्त में निर्विषयी (व्यसन मुक्त) होकर मैं सुखी होता। अस्पतालें पाप की जड़ हैं। उनकी बदौलत लोग शरीर का जतन कम करते हैं और अनीति को बढ़ाते हैं। यूरोप के डॉक्टर तो हद करते हैं। वे सिर्फ़ शरीर के ही गलत जतन के लिए लाखों जीवों को हर साल मारते हैं, जिंदा जीवों पर प्रयोग करते हैं। ऐसा करना किसी भी धर्म को मंजूर नहीं। हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, जरथोस्ती – सब धर्म कहते हैं कि आदमी के शरीर के लिए इतने जीवों को मारने की ज़रूरत नहीं। 80