भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 150 में से

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पृष्ठ 82

हिन्द स्वराज्य डॉक्टर हमें धर्मभ्रष्ट करते हैं। उनकी बहुत सी दवाओं में चर्बी या दारू होती है। इन दोनों में से एक भी चीज हिन्दू-मुसलमान को चल सके ऐसी नहीं है। हम सभ्य होने का ढोंग करके, दूसरों को वहमी मानकर और बे- लगाम होकर चाहे सो करते रहें, यह दूसरी बात है, लेकिन डॉक्टर हमें धर्म से भ्रष्ट करते हैं, यह साफ और सीधी बात है। इसका परिणाम यह आता है कि हम निः सत्त्व और नामर्द बनते हैं। ऐसी दशा में हम लोक सेवा करने लायक नहीं रहते और शरीर से क्षीण और बुद्धिहीन होते जा रहे हैं। अंग्रेजी या यूरोपियन डॉक्टरी सीखना गुलामी की गाँठ को मजबूत बनाने जैसा है। डॉक्टर हमें धर्म भ्रष्ट करते हैं। उनकी बहुत सी दवाओं में चर्बी या दारू होती है। इन दोनों में से एक भी चीज हिन्दू-मुसलमान को चल सके ऐसी नहीं है। हम सभ्य होने का ढोंग करके, दूसरों को वहमी मानकर और बे-लगाम होकर चाहे सो करते रहें, यह दूसरी बात है, लेकिन डॉक्टर हमें धर्म से भ्रष्ट करते हैं, यह साफ और सीधी बात है। हम डॉक्टर क्यों बनते हैं, यह भी सोचने की बात है। उसका सच्चा कारण तो आबरूदार और पैसा कमाने का धंधा करने की इच्छा है। उसमें परोपकार की बात नहीं है। उस धन्धे में परोपकार नहीं है, यह तो मैं बता चुका। उससे लोगों को नुकसान होता है। डॉक्टर सिर्फ़ आडम्बर दिखाकर ही लोगों से बड़ी फीस वसूल करते हैं और अपनी एक पैसे की दवा के कई रुपये लेते हैं। यों विश्वास में और चंगे हो जाने की आशा में लोग डॉक्टरों से ठगे जाते हैं। जब ऐसा ही है तब भलाई का दिखावा करने वाले डॉक्टरों से खुले ठग, वैद्य, नीम-हकीम ज्यादा अच्छे। 81