हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्द स्वराज्य का अर्थ था इटली के लोग उसके किसान। इमेन्युअल वगैरह तो प्रजा के नौकर थे। मैजिनी का इटली अब भी गुलाम है। दो राजाओं के बीच शतरंज की बाज़ी लगी थी, इटली की प्रजा तो सिर्फ़ प्यादा थी और है। इटली के मजदूर अब भी दुःखी हैं। इटली के मजदूरों की दाद-फ़रियाद नहीं सुनी जाती, इसलिए वे लोग खून करते हैं, विरोध करते हैं, सिर फोड़ते हैं और वहाँ बलवा होने का डर आज भी बना हुआ है। आस्ट्रिया के जाने से इटली को क्या लाभ हुआ ? नाम का ही लाभ हुआ। जिन सुधारों के लिए जंग मचा, वे सुधार हुए नहीं, प्रजा की हालत सुधरी नहीं। हिन्दुस्तान की ऐसी दशा करने का तो आपका मेरा स्वदेशाभिमान इरादा नहीं ही होगा। मैं मानता हूँ कि आपका विचार मुझे यह नहीं सिखाता हिन्दुस्तान के करोड़ों लोगों को सुखी करने का होगा, कि देशी राजाओं के यह नहीं कि आप या मैं राजसत्ता ले लूँ। अगर ऐसा मातहत जिस तरह प्रजा है तो हमें एक ही विचार करना चाहिए। वह यह कि कुचली जाती है उसी प्रजा स्वतन्त्र कैसे हो ? तरह उसे कुचलने आप कुबूल करेंगे कि कुछ देशी रियासतों में प्रजा दिया जाए। मुझमें बल कुचली जाती है। वहाँ के शासक नीचता से लोगों को होगा तो मैं देशी कुचलते हैं। उनका जुल्म अंग्रेजों के जुल्म से भी राजाओं के जुल्म के ज्यादा है। ऐसा जुल्म अगर आप हिन्दुस्तान में चाहते ख़िलाफ़ और अंग्रेजी हों, तो हमारी पटरी कभी नहीं बैठेगी। जुल्म के ख़िलाफ़ मेरा स्वदेशाभिमान मुझे यह नहीं सिखाता कि देशी जूझूँगा। राजाओं के मातहत जिस तरह प्रजा कुचली जाती है उसी तरह उसे कुचलने दिया जाए। मुझमें बल होगा तो मैं देशी राजाओं के जुल्म के ख़िलाफ़ और अंग्रेजी जुल्म के ख़िलाफ़ जूझूँगा। स्वदेशाभिमान का अर्थ मैं देश का हित समझता हूँ। अगर देश का हित अंग्रेजों के हाथों होता हो, तो मैं आज अंग्रेजों को झुककर नमस्कार करूँगा। अगर कोई अंग्रेज कहे कि देश को आजाद करना चाहिए, जुल्म के ख़िलाफ़ होना चाहिए और लोगों की सेवा करनी चाहिए, तो उस अंग्रेज को मैं हिन्दुस्तानी मानकर उसका स्वागत करूँगा। फिर, इटली की तरह जब हिन्दुस्तान को हथियार मिलें तभी वह लड़ सकता है, पर इस भगीरथ (बहुत बड़े) काम का तो मालूम होता है, आपने 98