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हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

हिन्द स्वराज्य पाठक : सब ऐसा कब करेंगे और कब उसका अंत आयेगा ? संपादक : आप फिर भूलते हैं। सबकी न तो मुझे परवाह है, न आपको होनी चाहिए। 'आप अपना देख लीजिए, मैं अपना देख लूँगा' यह स्वार्थ वचन माना जाता है, लेकिन यह परमार्थ वचन भी है। मैं अपना उजालूँगा, अपना भला करूँगा, तभी दूसरे का भला कर सकूँगा। अपना कर्तव्य मैं कर लूँ, इसी में काम की सारी सिद्धियाँ समाई हुई हैं। आपको विदा करने से पहले फिर एक बार मैं यह दोहराने की इजाजत चाहता हूँ कि : ■ अपने मन का राज्य स्वराज्य है। ■ उसकी कुंजी सत्याग्रह, आत्मबल या करुणा बल है। ■ उस बल को आजमाने के लिए स्वदेशी को पूरी तरह अपनाने की ज़रूरत है। ■ हम जो करना चाहते हैं वह अंग्रेजों के लिए हमारे मन में द्वेष है इसलिए या उन्हें सजा देने के लिए नहीं करें, बल्कि इसलिए करें कि ऐसा करना हमारा कर्तव्य है। मतलब यह कि अंग्रेज अगर नमक महसूल रद्द कर दें, लिया हुआ धन वापस कर दें, सब हिन्दुस्तानियों को बड़े-बड़े ओहदे दे दें और अंग्रेजी लश्कर हटा लें, तो हम उनकी मिलों का कपड़ा पहनेंगे या अंग्रेजी भाषा काम में लायेंगे या उनके हुनर का उपयोग करेंगे सो बात नहीं है। हमें यह समझना चाहिए कि वह सब दरअसल नहीं करने जैसा है, इसलिए हम उसे नहीं करेंगे। मैंने जो कुछ कहा है वह अंग्रेजों के लिए द्वेष होने के कारण नहीं, बल्कि उनकी सभ्यता के लिए द्वेष होने के कारण कहा है। मुझे लगता है कि हमने स्वराज्य का नाम तो लिया, लेकिन उसका स्वरूप हम नहीं समझे हैं। मैंने उसे जैसा समझा है वैसा यहाँ बताने की कोशिश की है। मेरा मन गवाही देता है कि ऐसा स्वराज्य पाने के लिए मेरा यह शरीर समर्पित है। 148

भविष्य में लोग इस आधार पर हमारा मूल्यांकन नहीं करेंगे कि हम किस सिद्धांत का दावा करते हैं या कौन सा 'लेबल' धारण करते हैं या कौन से नारे लगाते हैं, हमारा मूल्यांकन वे हमारे उद्यम, त्याग, ईमानदारी और चरित्र की शुद्धता से करेंगे। वे जानना चाहेंगे कि हमने वास्तव में उनके लिए क्या किया है। लेकिन अगर आप नहीं सुनेंगे, अगर आप लोगों के मौजूदा दुःख और असंतोष से लाभ उठाकर उसे दलीय स्वार्थों के लिए बढ़ाएंगे और उसका दुरुपयोग करेंगे, तो यह दुःख और असंतोष पलट कर आपके ही सिर पर पड़ेगा और जनता से इस विश्वासघात के लिए ईश्वर भी आपको क्षमा नहीं करेगा।