भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 124, कुल 254 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 124

[ १२४ ] शत्रुओं को इस घटना पर विश्वास नहीं होता था। उन लोगों को पहले ही यह ज्ञात हो गया था कि अब वह प्रायः नाश के निकट हैं। मरहठे दाहिने, बायें और मध्य में भी विजय प्राप्त कर चुके थे। अब्दाली, जबकि अत्यन्त सख्ती के साथ अपने भागते हुये सिपाहियों का वध करता हुआ, अकेला ही अपनी सेना को तितर-बितर होने से रोक कर पूर्ण पराजय से बचने का उद्योग कर रहा था, एकाएक यह देखकर बड़ा प्रसन्न हुआ कि किसी कारण मरहटों के पिछले भाग की सेना भयभीत होकर भागने की फ़िक्र में है। इसका कारण जानने से पहले ही अब्दाली की फ़ौज ने उस भयभीत पंक्ति पर आक्रमण कर दिया। इस अन्तिम आक्रमण का मरहठा-सेना का पिछला भाग मुक़ा- बिला न कर सका। दाहिने भाग पर युद्ध रुक गया और उसमें भगदड़ मच गई। परन्तु अब भी जिस स्थान पर भाऊ अपने कुछ चुने हुए आदमियों के साथ प्राण रहते जातीय झण्डे की रक्षा के लिये लड़ रहा था, घम- सान की लड़ाई हो रही थी। अपने योद्धाओं को 'लड़ो, मारो, काटो' इत्यादि शब्दों द्वारा उभारते २ भाऊ का गला बैठ गया। जब वह और न बोल सका तो इशारे से उत्साहित करते और उत्तेजना देते हुये अपने घोड़े को दौड़ाता हुआ बिल्कुल मौत के मुँह में ही चला गया। मुकुन्द शिएडे ने जब उसे इस प्रकार निराश देखा तो उसके घोड़े की लगाम पकड़ ली और अत्यन्त विनीत शब्दों में प्रार्थना की- "सेनापति ! आपने जो वीरता दिखाई है वह अमानुषिक है। हमारे शूरवीर योद्धाओं ने भी उतनी वीरता दिखला दी है जितनी मनुष्य के अन्दर हो सकती है। पर अब पीछे हट चलने में ही बुद्धिमानी है।" सेनापति भाऊ ये शब्द सुन कर चिल्ला उठा और कहने लगा- "क्या कहा ? हट चलो ?" क्या आप नहीं देखते कि हमारी जाति का शृङ्गार विश्वास मर गया और खेत में पड़ा है ? मैंने एक एक करके सेनापतियों को युद्ध करने की आज्ञा दी और शत्रुओं से लड़ते