हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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वीर धराशायी हो गये और सहस्रों को विजयी मुसलमान कैदी बनाकर अपने खैमों में ले गये और प्रातःकाल उन्हें कतार में खड़ा कराकर बड़ी निर्दयतापूर्वक कत्ल कर डाला । इस लड़ाई में पठानों के हाथ लूट का माल भी बहुत आया । किन्तु मर्हठों ने अपने दुश्मनों से इसकी जो कीमत वसूल की वह इससे कहीं अधिक थी । पठानों ने विजय लाभ की पर इसके लिए उन्हें बहुत कीमत देनी पड़ी। अन्तिम दिवस पर ही यवनों के चालीस हजार सिपाही काम आये थे । गोविन्दपन्त का सिर काटने वाले सेनापति अताईखां, उस्मान तथा अन्यान्य मुस्लिम-नेताओं का वध किया गया । नज़ीबखां भी बुरी तरह ज़ख्मी हुआ । इसके अति- रिक्त मुसलमान भी यह अनुभव करने लगे कि उनकी जीत शक्ति और सेनापतित्व के कारण इतनी अधिक नहीं हुई जितना कि संयोगवश । मरहठे युद्ध में हार गये, परन्तु शत्रु पर इतनी कड़ी चोट लगाई कि वह सदा के लिये युद्ध में विजय प्राप्त करने के अयोग्य बन गया । यदि पानीपत में हार हो हुई तो क्या हुआ ? पानीपत में मर्हठे नष्ट हो गये थे, पर महाराष्ट्र में अब भी ज़िन्दा थे । प्रत्येक घर को अपने किसी-न-किसी सम्बन्धी के लिये, जो कि पानीपत की लड़ाई में शहीद हुआ था, शोक करना पड़ा था । इस पर भी उस समय महाराष्ट्र में ऐसा विरला ही कोई घर बचा होगा जिस ने अपनी राष्ट्रीय मर्यादा को पुनः स्थापित करने और अपने सिपाहियों के बलिदान को सार्थक बनाने तथा उस उद्योग को, जिसे के लिये उन्होंने अपने प्राण गंवाये थे, फलीभूत करने की प्रतिज्ञा न की हो । अब्दाली की कार्य्य-क्रमावली को रोकने के लिये पेशवा ५०,००० सेना के साथ पहले ही नर्मदा पार कर चुका था । अपनी जनता और मुख्यतः अपने परिवार पर आये हुए विपत्ति-समाचार को सुन कर, नाना ने पानीपत की दुर्घटना पर विचार किये बिना, आगे बढ़ कर अब्दाली की शक्ति को नष्ट-भ्रष्ट