हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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हत्यारे उस पर टूट पड़े। चाफाजी तिलेकर, पेशवा और बलवाइयों की तलवार के बीच खड़े होगए और बच्चे को ढोंप लिया और इन पहरेदारों से अपने स्वामी के जीवन-दान के लिये प्रार्थना की; पर सब अरण्य-रोदन के समान निष्फल हुआ। अन्त मे हत्यारों ने पेशवा तथा उसके रक्षक ‘चाफाजी पर अपनी तलवार चलाना प्रारम्भ किया। पेशवा की मृत्यु निश्चित थी; उसकी आयु समाप्त हो चुकी थी। इस पर किसी का क्या वश चल सक्ता था ! यद्यपि चाफाजी ने ढाल बनकर पेशवा की रक्षा के लिये अनेकों प्रयत्न किये, पर सब निष्फल हुए और अन्त में अपना प्राण अपने स्वामी के साथ देकर उसने लोगों को स्वामि-भक्ति का अपूर्व आदर्श बताया। पेशवा को मार डालने के बाद बलवाइयों ने राघोबा को अपना पेशवा मशहूर करके महल को अपने अधिकारमें ले लिया। यह समाचार बिजली की भांति सारी राजधानी में फैल गया। वहां के निवासी क्रोधित होकर दल-के-दल बनाने लगे और सब ने एक- मत होकर शपथ ली कि वे लोग नीच हत्यारे राघोबा को अपना पेशवा स्वीकार न करेंगे। महाराष्ट्र में अभी तक आत्म सम्मान तथा चारित्रिक जीवन का भाव बचा हुआ था, अतः भयानक प्रासाद-षड्यन्त्र से डर कर वे लोग उसका, जिसको कि उन्होंने अपना अधिनायक या स्वामी न चुना हो, आधिपत्य स्वीकार करने के लिये तैयार न थे, इसलिये नेता तथा राज्य के प्रमुख लोगों ने राज्य-परिवर्तन के लिये एक गुप्तसभा स्थापित की और राज्य के प्रधान न्यायाधीश रामशास्त्री के पास पेशवा की हत्या का अभियोग चलाने की प्रार्थना की। रामशास्त्री को शीघ्र ही निश्चय हो गया कि राघोबा और उसकी स्त्री आनन्दीबाई ने मिलकर ही यह नीच कर्म किया है तथा उसे पूर्ण विश्वास हो गया कि इस नवयुवक पेशवा की हत्या का मूल कारण ये ही लोग हैं। वह निर्भीक ब्राह्मण सीधे उस महल में चला गया, जहां राघोबा अपने सपक्षियों द्वारा सुरक्षित बैठा था। उसने उसके मुंह पर साफ २ कह दिया कि अपने भतीजे अर्थात् राष्ट्र के नये पेशवा की हत्या करने वाले आप ही हैं। राघोबा ने अपराध