भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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पृष्ठ 178

[ १८० ] का मौका देते देख कर नाना को बड़ा ही दुःख हुआ और उसने राजपूतों और खास कर जयपुर के राजा के साथ पत्र-व्यवहार करना प्रारम्भ किया। उसने पेशवा की तरफ़ से पत्र लिखा, जिसमें महाराजा जयपुर को समझाने का प्रयत्न किया गया था कि मुसलमान हिन्दू-मात्र के शत्रु हैं और मरहठा-राज्य प्रायः स्थापित हो चुका है, अतएव आप लोगों को शत्रुओं के साथ मिलकर हमारे साथ शत्रुता करना उचित नहीं। पूना से भेजी हुई मरहठा-सेना की सहायता से महादजी ने शत्रुओं को भलीभांति पराजित कर दिया। फिर उसने बाता खां, अप्पा खांडे- राव और अन्य मरहठे-सेनापतियों के साथ डी बोइन की अध्यक्षता में दो सुशिक्षित सेनायें नजीव खाँ के पोते गुलामकादिर का सामना करने के लिये भेजीं। मुसलमानों ने भी युद्ध करने की ठान ली। दो बड़ी घमसान की लड़ाइयां हुईं। मुसलमान ऐसी बुरी तरह पराजित हुए जैसे पहले कभी नहीं हुए थे और इधर उधर भाग निकले। इस्माइल वेग और गुलामकादिर दिल्ली की ओर भगे। मरहठों ने उनका बड़ा पीछा किया। बादशाह भय से कांपने लगा। गुलामकादिर ने रुपया मांगा, पर बादशाह न दे सका। इस पर निर्दयी और असभ्य रुहेले सरदारों ने क्रोध से पागल होकर अत्याचार करना आरम्भ कर दिया और लूटमार करनी आरम्भ करदी। गुलामकादिर ने बादशाह को सिंहासन से खींच कर पृथ्वी पर दे मारा और अपने दोनों घुटनों को उसकी छाती पर रख कर, तलवार से उस बूढ़े, बेबस, अकबर और औरंगज़ेब की सन्तान की आंखें निकाल लीं। इतनी ही निर्दयता से उसे संतोष न हुआ, उसने उसकी स्त्रियों और लड़कियों को पकड़वा मंगाया और अपने नौकरों को उन पर अपनी आंखों के सामने बलात्कार करने की आज्ञा दी। गुलामकादिर के क्रोध करने के कारणों में एक कारण यह भी था कि वह अपनी जवानी के समय में शाहआलम की आज्ञा से नपुंसक बनाया गया था। राजधानी में लूट मच गई। मुसलमान मुसलमानों के ऊपर