हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
पृष्ठ 191, कुल 254 में से
संदर्भ में पढ़ें[ १६३ ] काल में हम इतने दबा दिये गये कि हमारी यज्ञोपवीत धारण करने की धार्मिक स्वतन्त्रता भी छिन गई । इस समय अपने धर्म के निमित्त विवश होकर पोल-टैक्स देना पड़ता था तथा हमें विवश होकर अपवित्र भोजन खरीदना और खाना पड़ता था । 'ऐसे नाजुक समय में महाराज शिवाजी का जन्म हुआ जो एक नवीन युग के प्रवर्तक और धर्म के रक्षक थे । उन्होंने भारतवर्ष के एक कोने को स्वतन्त्र करके हिन्दू-धर्म को शरण दी । उसके पश्चात् नाना साहब और भाऊसाहब हुये, जिनका तेज सूर्य की भांति चमका । जो कुछ हम खो चुके थे वह सब महादजी सींधिया की बुद्धिमत्ता द्वारा हम लोगों ने महाराज पेशवा के शासनकाल में फिर लौटा लिया । यह सब कार्य किस प्रकार सम्पादित हुए यह सोचकर आश्चर्य होता है । एक बार भी सफलता प्राप्त कर लेने पर हम अन्धे हो जाते हैं और उसके भारी परिणाम को नहीं देखते । यदि ऐसी सफलता मुसलमानों ने प्राप्त की होती तो कई इतिहास उनके गुणानुवाद में तैयार हो जाते । मुसलमान एक छोटे काम को भी आसमान तक चढ़ा देते हैं, पर इसके विपरीत हिन्दू यदि कोई कितना भी गौरवपूर्ण कार्य क्यों न करें, हम उस प्रकट तक नहीं करते । किन्तु वास्तव में आश्चर्यजनक घटनाएं हुई हैं; अजेय जीता गया है । मुसलमान राज्य को काफिरों के हाथ मे जाने और काफिरशाही आने की बात सोच २ प्रत्यक्ष रो रहे हैं । 'वास्तव में जिन जिन लोगों ने भारतवर्ष में हमारे विरुद्ध सिर उठाया, महादजी ने सब को चकनाचूर कर दिया । हम लोगों ने जितनी सफलता प्राप्त की है वह मानवशक्ति के बाहर है । बहुत अंशों में सम्पूर्ण होते हुये भी अभी हमें बहुत से कार्य करने शेष हैं । कोई नहीं जानता कि कब और कहां हमारे गुण हमे असफल बनादें और दुष्टों की क्रूर दृष्टि हमारे लिये हानिकारक हो । हम लोगों का गौरव राज्य प्राप्त करने तक ही परिमित नहीं है, हम संसारिक सुखों से ही सन्तुष्ट नहीं हो सकते; वरन् वेद, पुराण और शास्त्रों की रक्षा, धर्म और हिन्दू-सभ्यता की वृद्धि