हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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भांति ताड़ गये थे जिसके कारण कि वे सफल हो रहे थे और इस प्रकार के सैनिक ड्रिल और डिसिप्लिन को उन्होंने आत्मसात कर लिया था। उन्होंने महादजी सींधिया तथा बख्शी आदि अपने सुयोग्य नेताओं की अध्यक्षता में, इन यूरोपियनों द्वारा प्रयुक्त हथियारों को चलाना और बनाना भी अच्छी तरह सीख लिया था जिससे यह सिद्ध होता है कि महाराष्ट्र-मण्डल, जो उन्नत होता हुआ हिंदु-साम्राज्य में परिणान हो चुका था, उन सब गुणों को ग्रहण कर लेता और उनका विकसित भी कर पाता जो कि उन यूरोपियनों में पाये जाते थे। जिस प्रकार मरहठो ने मुसलमानों को पराजित किया था उसी प्रकार वे भारत में एक संयुक्त राष्ट्र या जर्मन साम्राज्यकी तरह हिंदुओं की संगठित रियासतों के आकार में एक हिंदू साम्राज्य को स्थापित करन में सफल हो जाते । परंतु हम इन कल्पनाओं को एक ओर रखकर उन सभी घटनाओं का उल्लेख करते हैं जिनकी साक्षी इतिहास देता है। उन घटनाओं का मूल्य, उस समय के आदर्शों और परिस्थितियों के अनुसार आंकने का प्रयत्न करेंगे। इस ऐतिहासिक परिमाण से यदि हम विचार करें तो भारतवर्ष का कोई भी सम्प्रदाय इसके लिये दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि वह शीघ्र ही हिंदू-प्रजातन्त्र राज्य स्थापित करने में असफल रहा है। यदि हम शिवाजी को दोषी ठहराना चाहें तो केवल उनपर इतना ही दोष आरोपित कर सकते हैं कि वह मोटर पर नहीं चलते थे, और महाराज जयसिंह को इसलिये दोषी ठहरा सकते हैं कि उन्होंने अपने आंदोलन को समाचार पत्रों द्वारा नहीं फैलाया। इस प्रकार के अपराधी या तो भारतवर्ष के हिंदू मात्र हैं या कोई भी नहीं है। यदि हम ध्यानपूर्वक देखें तो हमें स्पष्ट ज्ञात हो जायगा कि मरहठों के अतिरिक्त हिंदुओं के किसी सम्प्रदाय के लोगों में इतना उत्साह नहीं आया था, जो अपने प्रान्तीय भेदभावों को छोड़-कर हिंदूजाति के हित में लीन हो जाते। केवल मरहठे ही देश को दासता की बेड़ी से मुक्त कराने के लिये प्राणपण से प्रयत्न