हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ७६ ] आस्ट्रिया या फ्रांस के शासन द्वारा बहुत ही पीड़ित थे, उन्हें विदेशियों की परतंत्रता रूपी बेड़ी की कुछ भी चिंता न थी। जिस प्रकार दास अपने मालिक की नीच से नीच आज्ञाओं के पालन करने का अभ्यासी बन जाता है और अपने बराबर की श्रेणी के लोगों की आज्ञाओं के पालन करने या उन्हे अपना बड़ा समझने में अपना बड़ा अपमान समझना है उसी प्रकार रोम निवासी पाइडमांट के आदेशों के अनुसार चलने में अपना बड़ा ही अपमान समझते थे। इसलिये इटली मे संगठन स्थापित करने के लिये गेरीबाल्डी इम्मानल और दूसरे सेनापतियों को विदेशियों से ही नहीं, किन्तु इटली के लोगों से भी लड़ना पड़ा। इतिहास उन्हें इस कार्य के लिये दोषी नहीं ठहराता। वर्तमान काल के इटली निवासी, जिनमें नेपोलियन और रोमनों के भी वंशज सम्मिलित हैं, इटली के इन निर्मा- त्ताओं के नाम सुन कर, उनके किये गये उपकारों का स्मरण करके भक्ति और श्रद्धा से अपनी टोपियां उतार लेते हैं और भांति-भांति से उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं। पाइडमांट का राजा ही पश्चात् में सर्वसम्मति से इटली का बादशाह स्वीकार कर लिया गया। इसी प्रकार यदि उचित परिस्थिति और समय आ गया होता तो मरहठों का राजा भी हिंदुस्तान का सम्राट् स्वीकार कर लिया जाता। इस योग्य पद के लिये उसमे गुण भी वर्तमान थे। शत्रु और मित्र सब लोगों ने यह सुना था कि विश्वासराव को भाऊ ने हिन्दुस्तान का राजाधिराज घोषित कर दिया है। जर्मन राज्य, उनकी स्वतन्त्रता और उनकी एकता का इतिहास मरहठा काल के भारत के राजनैतिक विकास के इतिहास से समानता रखते हैं, जिनमें हिन्दू राजे एक होकर मरहठों के राजा को अपना सम्राट् मानकर काम कर रहे थे। जिस प्रकार पाइड- मांट का इटली राज्य तथा प्रशिया का साम्राज्य राष्ट्रीयता के भावों से परिपूर्ण थे, उसी प्रकार महाराष्ट्र के हिन्दू साम्राज्य में भी राष्ट्रीयता और हिन्दू-हित का उद्देश्य कूट २ कर भरा था, उसके लिये प्रत्येक