भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 237, कुल 254 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 237

[ ३६ ] उसे गाड़ा और शत्रुओं को विवश किया कि उनके सामने घुटने टेकें और उसकी प्रतिष्ठा करें. उस आन्दोलन और उस हिन्दू साम्राज्य के प्रति प्रत्येक हिन्दू देशभक्त सदा कृतज्ञता प्रकट करता रहेगा। ५. हिन्दू-जाति का काया-कल्प । "शास्त्रेण रक्षिते राष्ट्रे शास्त्रचिंता प्रवर्तते" ॐ यद्यपि मरहठों की जागृति के कारण हिन्दुओं के पुनरुद्धार की ख्याति हुई तो भी इसे सर्वप्रथम हिन्दुओं की राजनैतिक और सैनिक परिधि में जीवन डालकर एक विशाल राष्ट्रीय राज्य स्थापित करना परमा- वश्यक था जिससे कि हिन्दुओं के जीवन का प्रत्येक भाग प्रगतिशील होता, ज्योंही मरहठाशक्ति की रक्षा में हिन्दुओं को पूर्णतया राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त हो गई उन्होंने एक राष्ट्रीय राज्य स्थापित कर दिया । महाराष्ट्र का हिन्दूराज्य कई महत्वपूर्ण कार्यों और सुधारों को, जो इस पुनरुद्धार के आन्दोलन के कारण हिन्दुओं में प्रचलित हुए, अपने हाथों में लेकर उनको उन्नतिशील दशा में लाया । शत्रुओं में जो गुण थे उन्हें अपनाकर विदेशियों के आतङ्क के पंजे से हिन्दू जीवन को स्वतन्त्र और मुक्त करने के लिये मरहठों ने बड़ा ही प्रयत्न और परिश्रम किया। हिन्दुओं की भाषा के ऊपर अरबी और फारसी का इतना अधिकार हो गया था कि राज्य के सारे कार्य फारसी भाषा में किये जाते थे । पर ज्यों ही मरहठों ने हिन्दू राज्य की स्थापना कर ली उन्होंने सारा राज्य-कार्य फारसी में करना बन्द करा दिया । फिर उन्हों ने पहले अपनी भाषा को शुद्ध करने का ॐ शस्त्रों द्वारा देश की रक्षा होती है, इस लिये शस्त्रों को ठीक रखना उचित है ।