भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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कर दिया गया। नये ढंग की पूजा, भिन्न २ वर्गों का आपस में विवाह और सामुद्रिक यात्रा का प्रबन्ध किया गया। जो लोग विदेशों को जाने के कारण जातिच्युत किये गये थे या जिन को पुर्तगेजों या मुसलमानों ने बलपूर्वक या धोखा दे कर अपने धर्म में मिलाया था, फिर' से हिन्दू धर्म में लाये गये। अन्तिम आंदोलन अर्थात् शुद्धि का प्रश्न हमारे पूर्वजों में मरहठा-काल ही में आरम्भ हो चुका था। पुर्तगेजों के लिखित प्रमाणों से पता चलता है कि बड़े २ ब्राह्मण, पुर्तगेजों द्वारा बलपूर्वक ईसाई धर्म में मिलाये गये हिन्दुओं को, फिर से छिप २ कर पवित्र जल में स्नान कराकर शुद्ध करके हिन्दू बना लिया करते थे। एक बार इस छिपी हुई शुद्धि की प्रथा का समाचार पुर्तगेजों को भी मिल गया। उन्होंने जा कर उस स्थान को, जहां शुद्धि हो रही थी, घेर लिया और बन्दूकों के डर से लोगों को भगा दिया पर एक गोस्वामी ने एक इंच भी हटने से इन्कार कर दिया और मार डाला गया। निम्बालकर नामी मरहठा सरदार को बीजापुर के नवाब ने जबर्दस्ती मुसलमान बना लिया और अपनी लड़की का उसके साथ ब्याह कर दिया। लेकिन अन्त में वह भाग कर मरहठों के पास आया और ब्राह्मणों की आज्ञानुसार शिवाजी की माता जीजाबाई की संरक्षता और इच्छा से उसे शुद्ध करके हिन्दू धर्म में लाया गया और कट्टर सनातनधर्मी भावों को मिटा देने के लिये उसके बड़े लड़के का विवाह महाराज शिवाजी की पुत्री से करा दिया। दूसरी बड़ी मश- हूर शुद्धि नेताजी पालकर की हुई। वह बहादुर मरहठा-सेनापति— जो दूसरा शिवाजी कहलाता था—मुसलमानों के हाथ में फंस गया और औरङ्गजेब बादशाह ने आज्ञा दी कि इसे मुसलमान बना कर सीमांत प्रदेश की असभ्य जातियों में रहने के लिये भेजा जाय। ऐसा ही हुआ, परन्तु किसी प्रकार से बहादुर सेनापति भाग कर महाराष्ट्र पहुंचा और उसने लोगों से प्रार्थना की कि मुझे हिन्दू-धर्म में स्थान दो। पण्डितों ने उसकी सिफारिश महाराज शिवाजी के पास की और इस प्रकार उसे