भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 242, कुल 254 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 242

[ ४४ ] हिंदू धर्म में ले लिया गया। पेशवा भी इस कार्य को नाना फड़नवीस के समय तथा इसके बाद तक करते आये। 'पेशवाओं की डायरी' नामक पुस्तक को, जिसमें मूल आज्ञाएं और लिखित प्रमाण प्रकाशित हुए हैं, देखने से प्रकट हो जाता है कि ऐसी बहुत सी घटनाएं हुई हैं कि कई लोग बलपूर्वक मुसलमान अथवा ईसाई बनाये गये, किन्तु प्रायश्चित करने पर उन लोगों को पुनः हिन्दू धर्म में शरण दी गई और उनके सजातीय लोग उनके साथ पहिले की भांति सामाजिक सम्बन्ध रखने लगे। उदाहरण के लिये पुनाजी को लीजिये। पुनाजी एक सिपाही थे और सूरत ज़िला स्थित सेना में काम करते थे। किसी प्रकार वे मुसलमानों के हाथ में फंस गये और मुसलमान बना लिये गये। लेकिन जब बालाजी बाजीराव दिल्ली से लौट कर आ रहे थे वह भाग कर किसी प्रकार मरहठा-सेना से मिल गया। उसके सब सजातीय लोगों ने एकत्र होकर उसे अपनी जाति में ले लेने का विचार प्रकट किया और पेशवा की आज्ञा लेकर उसे अपनी जाति में मिला लिया [ पृष्ठ २१५-२१६] । तुलाजी भट ने, जो प्रलोभनों द्वारा मुसलमान हो गया था, ब्राह्मण- मंडली के सामने खड़े हो कर अपने किये पर पश्चाताप किया। अपने अपराध को स्वीकार कर उसके लिए क्षमा की प्रार्थना की। उसे भी हिन्दू-धर्म में स्थान दिया गया और राजाज्ञा निकली कि चूंकि ब्राह्मण मण्डली ने भटजी को स्वीकार कर लिया है इसलिये उसे सजातीय सब सुविधायें दी जांय। महाराज सम्भाजी के अशान्त शासन-काल में भी इस प्रकार के उदाहरण पाये जाते हैं। उनके शासन काल में गङ्गाधर कुलकर्णी की शुद्धि हुई, जो कि ज़बरदस्ती मुसलमान बनाया गया था। इस के सम्बन्ध में सम्भाजी ने यह घोषणा कर दी थी कि गंगाधर हिन्दू-धर्म में सम्मिलित किया जा रहा है। जो मनुष्य उसके साथ खान- पान का भेद भाव रक्खेगा वह देव धर्म के सिद्धांतों की अवहेलना करने का अपराधी समझा जायगा और वह स्वयं भी पापी समझा जायगा।