हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ४५ ] हम यहां पर जोधपुर की राजकुमारी इन्द्राकुमारी की घटना का उल्लेख भी कर देना अनुचित नहीं समझते । उसका विवाह मुग़ल सम्राट् के साथ हुआ था । पर जब वह कई सालों के पश्चात् वापिस आई तो राजपूतों ने उसे शुद्ध करके हिंदू धर्म मे मिला लिया था । यह स्वाभाविक बात थी कि जिन लोगों ने राजनैतिक बुराईयों को—जिसने कि हमारी मातृभूमि को इतना पीड़ित किया था—दूर करने का कार्य अपने हाथ मे लिया था वे उसके साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक बुराईयों को भी दूर करें, क्योंकि वे राजनैतिक बुराइयों से अधिक हानिकारक थीं । हिन्दुओं की स्वतन्त्रता और हिंदुओं के पुनरु- द्धार के जिस आन्दोलन ने राजनैतिक और सैनिक क्षेत्रों में इतनी सफ- लता प्राप्त की उसने हमारे धार्मिक, सामाजिक पवित्रता और सभ्यता सम्बन्धी कार्यों को भी, जो शताब्दियों से बिगड़ते चले आते थे, ठीक रास्ते पर लाने मे कुछ उठा नहीं रक्खा । मुसलमान लोगों ने केवल एक सौ वर्ष के भीतर सारे दक्षिण मे अपने धर्म और राज्य को फैलाया, लाखों मनुष्यों को मुसलमान बनाया, परन्तु खेद का विषय है कि हिन्दू- जाति, हिन्दू-साम्राज्य रहने पर भी दो-चार सौ भी मुसलमानों को हिन्दूधर्म में नहीं ला सकी; किन्तु यदि उन्होंने ऐसा करना चाहा होता और इसके यहां यदि ऐसी प्रथा प्रचलित होती तो वे अवश्य सफलीभूत हुए होते । इसका मुख्य कारण यह है कि मनुष्यों की दासता की राजनैतिक बेड़ी कभी २ शीघ्र तोड़ी जा सकती है, किन्तु अन्धविश्वास को मनुष्यों के भीतर से हटाना एक बड़ा ही कठिन कार्य है । इसके साथ-ही-साथ इस बात पर भी ध्यान रखना चाहिये कि मरहठों की सारी शक्ति पहले हिन्दुओं की राजनैतिक स्वतन्त्रता प्राप्त करने में और हिन्दू-साम्राज्य स्थापित करने ही मे लग गई, इसलिये उन्होंने यदि सामाजिक सुधारों की ओर, जो परमावश्यक थे, यदि विशेष उन्नति नहीं की तो हमे इसके ऊपर कोई आश्चर्य करने की आवश्यकता नहीं है ।