भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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[ ४६ ] किन्तु आश्चर्यजनक बात तो यह है कि उन्होंने झूठे अंधविश्वासों को, जो हिन्दुओं के मस्तिष्कों में भरे हुए थे, हटाकर उनकी जगह पर शुद्धि की प्रथा को उनके भीतर स्थान दिलाया, जिसकी स्थापना करना उस समय कठिन ही नहीं वरन् असम्भव था । ६. प्रेम और कृतज्ञता का ऋण । ॐ सौख्य स्मरुनि राज्याचें मीनापरि अखंड तळमलती --प्रभाकर अब हमारे अंतिम और--जहां तक हमारी जाति के भूतकालिक इतिहास का सम्बन्ध है--हमारे हिन्दू साम्राज्यों में से सर्वश्रेष्ठ साम्राज्य पर एकाएक पर्दा गिरता है । जिस अशुभ दिन सिन्ध नदी के किनारे, हमारे शूरवीर सिन्धराज दाहिर की पराजय हुई, उसी दिन हमारे भाग्य की भी पराजय हो गई । काबुल के हिंदू महाराज त्रिलोचनपाल, पंजाब के राजा जैपाल और अनंगपाल, दिल्ली के महाराज पृथ्वीराज और कन्नौज के जयचंद, चित्तौर के महाराना सांगा, बंगाल के महाराजा लक्ष्मण सेन, रामदेव राव्रो और देवगिरि के राजा हरपाल, विजयनगर के सारे राजे और रानियां, राज- सिंहासन और मुकुट--सिंध से लेकर समुद्र पर्यंत एक-एक करके सब मिट्टी में मिल गये । निडर, धृष्ट और अजेय शत्रु हमारी हिंदू-जाति की हांपती हुई छाती को अपने घुटने से दबाये हुए खड़ा हो गया । चित्तौर ही नहीं, किन्तु सारे भारतवर्ष की हिंदू-राजधानियां राख की ढेर बन गईं । कभी-कभी उसी राख के ढेर से बलिदान की चिनगारियां एक क्षण के लिये प्रज्वलित हो उठती थीं । शाही तख्तताऊस पर ॐ राज्य के वैभव को देख कर ( शत्रु ) मछली की तरह तड़पते थे ।