भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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बीस वर्ष बीत गये। अब औरंगज़ेब का चेहरा मलिन और उसकी आवाज़ धीमी पड़ गई। वह मरहठों के नवयुवकों का झुंड हिन्दू-राज्य का हृदय बन गया। औरङ्गजेब बादशाह ने फिर प्रण किया 'मैं काफ़िरों के झुंड को पहाड़ ही में नष्ट कर दूंगा'। सहस्रों चमचमाती हुई तलवारों के साथ क्रोध से भरे हुए औरङ्गजेब बादशाह ने शिवाजी के छोटे से राज्य पर आक्रमण कर ही दिया और उस देश को पावों तले कुचल दिया पर इसके कारण वहां ऐसे विद्रोह को जन्म मिला जो उसके पावों को चिपट गया। शक्तिशाली मुसलमानी राज्य लड़खड़ाया। अब वह न तो स्थिर ही रह सकता था और न ही उन से पीछा छुड़ा सकता था। इस प्रकार खाई चौड़ी और गहरी होती गई। बाहर निकलने के लिये वह जितना ज़ोर लगाता उतना नीचे धंसता जाता। अंत में वह ऐसा फंसा कि वह फिर कभी उभर न सका। उसकी मृत्यु तथा लाखों चमकती हुई तलवारों की समाप्ति होने के बाद मरहठों ने फिर शक्ति ग्रहण की और उस शाही मक़बरे के समीप हिंदुओं का छोटा सा राज्य एक महान् हिन्दू- साम्राज्य में परिणत हो गया। क्योंकि अब शीघ्र ही मरहठों का झुंड अपनी गेरुआ ध्वजा लिये बाहर निकला और हिन्दू-धर्म की स्वतन्त्रता की लड़ाई को सारे भारत- वर्ष में फैला दिया। मरहठों ने गुजरात, खानदेश, मालवा और बुन्देल- खंड में प्रवेश किया, उन्होंने चम्बल, गोदावरी, कृष्णा, तुंगभद्रा नदियों को पार किया। उन्हों ने चित्तौड़, नागपुर, उड़ीसा को अधीन किया और धीरे २ बढ़ कर एक २ पत्थर जोड़ कर यमुना से तुंगभद्रा तक और द्वारिका से जगन्नाथ तक तमाम देश को मुसलमानों के शासन से मुक्त करा कर शक्तिशाली हिन्दू-राज्य में परिणत कर दिया। वे यमुना, गंगा और गंडकी आदि नदियों को पार करके पटना पहुंचे, जो महाराज चन्द्रगुप्त की राजधानी थी, कलकत्ता में काली जी की और काशी में विश्वनाथ जी की पूजा की। इन दस, बारह नवयुवकों के उत्तराधिकारी