हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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अब लाखों की संख्य, में अपने झंडे को फहराते हुए और बाजा बजाते हुए मुसलमानी राज्य की राजधानी की ओर चल पड़े और उसके फाटकों को जा खटखटाया। उन्हें देख कर मौलवी और मौलाने आश्चर्य में पड़ गये। अभी तक उनका यही दृढ़ विचार था और वे दूसरों को भी यही विश्वास करने पर बाध्य कर रहे थे कि कुरान सच्चा है क्यों इस्लामी सेनाओं द्वारा पुराणों के मानने वाले हिन्दुओं पर राजनैतिक विजय प्राप्त हुई है। पर अब जब उन्हों ने देखा कि पुराणों के मानने वाले हिन्दू भिन्न २ सम्प्रदाय और जाति में विभक्त, मूर्ति-पूजक और बिना दाढ़ी के होते हुए भी, असीम सेना के साथ दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं और उन्होंने अपना गेरुआ झंडा मुसलमानी क़िलों पर गाड़ दिया है, तो ये निराशा के सागर मे डूब गये। इस बार जब्राईल कुरान के विरुद्ध 'पुराण' की सफलता देख कर लड़ने को न आया। उनका विश्वास था कि भूतकाल मे वह ऐसे समयों पर आया करता था अब कोई यह नहीं कह सकता कि क्योंकि मुसलमान धर्म सच्चा है इसी लिये उस की विजय होती रही है; और क्योंकि हिन्दू-मन्दिर गिराये गये थे इसलिये उनका धर्म झूठा है। मुसलमानों का वह ऊपरिलिखित दावा, जिस पर कि वे असंख्य हिन्दुओं को मुसलमान बनाते थे, अब झूठा प्रमाणित हुआ। अब मन्दिरों की चोटियां मसजिदों से ऊपर उठी दिखाई देने लगीं। चांद की रोशनी फ़ीकी पड़ गई और उनका झंडा अन्तिम सांस लेने लगा और हिन्दू राज्य का सुनहरा झंडा फहराने लगा। दिल्ली पर फिर पृथ्वीराज के वंशजो का शासन हो गया और हस्तिनापुर फिर एक बार हिन्दुओं के हाथ में आ गया। औरङ्गज़ेब ने शिवाजो को चूहा कहा था, लेकिन उसी चूहे ने शेर को उस की मांद में जा ललकारा और उसके पंजे और दांतों को एक २ करके उखाड़ लिया। गुरु गोविन्दसिंह जी के "चिड़ियों से मैं बाज मरवाऊं" कथनानुसार गौधों ने गौ-वधिकों को मार डाला।