हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ५० ] वे शूरवीर कुरुक्षेत्र में स्नान करके अपनी विजयी सेना को लाहौर ले गये। अफ़गानों ने उन्हें रोकना चाहा, पर अटक के पार भगा दिये गये। वहां पर मरहठा वीर ने लगामें खींची और घोड़े से उतर कर थोड़ा विश्राम किया क्योंकि उसके सेनापति और नेता पूना में एकत्र होकर काबुल पार के हिन्दूकुश के ऊपर आक्रमण करने का विचार कर रहे थे। फ़ारस, इंगलैंड, पुर्तगाल, फ्रांस, हालैंड और आस्ट्रिया के राजदूत पूना में पहुंचे और उन्होंने प्रार्थना की कि वे लोग अपने राष्ट्रों की ओर से महाराष्ट्र के शाही दरबार में राजदूत बन कर रहना चाहते हैं। बंगाल के मुसलमान नवाब, लखनऊ के मुस्लिम वायसराय, मैसूर के मुसलमान सुलतान, हैदराबाद के मुस्लिम निज़ाम और रुहेलखंड और अर्काट इत्यादि के छोटे बड़े सरदार अब मरहठों को कर, “चौथ” और “सर- देशमुखी”–देने लगे। और भी सब कुछ देने को तय्यार थे। वे तो अब केवल जीना ही चाहते थे। निज़ाम अब नाममात्र के निज़ाम रह गये और जो कुछ मालगुज़ारी राज्य में एकत्र करते थे, वह किसी न किसी प्रकार मरहठा-राजकोष में आ ही जाया करती थी। मरहठों के शत्रु भारतवर्ष के यवन ही नहीं थे, वरन् हम देखते हैं कि ईरानी, काबुली, तुर्क, मुग़ल, रुहेले और पठान, पुर्तगेज़, फ्रेंच, इंगलिश और अबेसीनियन लोग सभी एक-एक करके मरहठों से स्थल और जल पर लड़े, किन्तु हिन्दू-सेना ने देश और धर्म के नाम पर लड़कर उन्हें पराजित कर दिया। रंगाना, विशालगढ़, चाकन, राजापुर वैनगुरला, बरसीनूर, पुरंधर, सिंहगढ़, साल्हेर, ऊम्बरानी, सवनूर, संगमनेर, फोंडा, वाई, फाल्टन, जिनजी, सितारा, दिनदोरी, पालखेड़, पेटलाद, चिपलून, विजयगढ़,