भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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और न उतना गौरव प्राप्त कर सका । और जहां तक जातीय सेवाओं, आत्म बलिदानों का संबंध है, किसी को भी मरहठों की तरह भयंकर आपदाओं और विपत्तियों का सामना नहीं करना पड़ा और ऐसी कठि- नाइयों का सामना करते रहने पर भी कोई भी राज्य मरहठा राज्य की तुलना नहीं कर सकता । शायद हमारे इतिहासों में, जो मनुष्य सब हिंदू राजाओं को परास्त कर देता था, वह चक्रवर्त्ती कहलाता था और जो विदेशियों से देश और धर्म की रक्षा करता था उसे 'विक्रमादित्य' कहा करते थे । पहले विक्र- मादित्य ने सीदियन लोगों को देश से निकाला, दूसरे ने शक लोगों को और तीसरे ने, जिन्हें यशोधर्मा विक्रमादित्य कहते हैं; हूण लोगों को हटाकर उनके राजा को एक महान् युद्ध में मार डाला । यदि हमारी यह कल्पना सत्य है कि विक्रमादित्य का महान् पद उसे ही मिलता था जो धर्मयुद्ध में लड़कर विदेशियों को मार भगाता था, तो जो दिग्विजय करने के लिये अपनी सैनिक शक्ति के उत्कर्ष के लिये नहीं अपितु देश और धर्म दोनों को विदेशियों की पराधीनता से स्वतन्त्रता कराने के लिये लड़े हों और उन्होंने उन पर विजय पाई हो तब उनके कार्य, जिन्होंने यह सब से आखिरी हिन्दू-साम्राज्य स्थापित किया, कई प्राचीन चक्रवर्तियों और विक्रमादित्यों के कार्यों और उनके उद्देश्यों की दृष्टि से किसी प्रकार भी कम महत्त्वशाली नहीं। इसलिये वे भी चक्रवर्ती और विक्रमादित्य दोनों पदों से विभूषित किये जाने के अधिकारी हैं और प्रत्येक हिन्दू का धर्म है कि वह उनके प्रति वही भाव रक्खे जो पुराने भारतीय अपने चक्रवर्ती राजाओं और विक्रमादित्य राजाओं के प्रति रखा करते थे। क्योंकि उन्होंने जातीय पताका राजपूतों के शिथिल हाथों से पकड़ी और हिंदुओं से घृणा करने वाले सभी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी तथा दाहिर, अनंगपाल, जैपाल, पृथ्वीराज, हरपाल, प्रताप इत्यादि राजाओं के बलि -