हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ २६ ] ५. सम्भाजी की मृत्यु का बदला "मरीनि अवघ्यांसि मारावें । मारितां मारितां घ्यावें । राज्य आपुलें" —रामदास राजकुमार संभाजी के धर्म पर बलिदान हो जाने का समाचार ज्यों ही महाराष्ट्र वासियों के कानों में पहुंचा त्यों ही सब के भाव उनके प्रति शीघ्र ही बदल गये अर्थात् उनके आजन्म के किये बुरे कर्मों तथा अपराधों को सभी भूल गये । अपने राजकुमार के प्रति उन में विशेष श्रद्धा उत्पन्न हो गई । उनकी धमनियों में रक्त खौलने लगा और शत्रुओं से राजकुमार की हत्या का बदला लेने के लिये सभी कटिवद्ध हो गये । धन और साधनों के अभाव में भी उन्होंने स्वतन्त्रता प्राप्त करने का संकल्प कर लिया । सबने एकत्रित होकर शिवा जी के द्वितीय पुत्र राजाराम को अपना अगुआ एवं राजा मान कर हिन्दू धर्म और हिन्दू राज्य की रक्षा के लिये मर मिटने की शपथ ली । समर्थ गुरु रामदास जी की शिक्षायें— 'धर्मासाठीं मरावें, मरोनि अवघ्यांसि मारावें ॥ मारितां मारितां घ्यावें । राज्य आपुलें ॥१॥ मराठा तितुका मेलवावा । आपुला राष्ट्रधर्म वाढवावा ॥ येविशीं न करितां तकवा । पूर्वज हासती ॥ २ ॥ 🌸 मरहठे उनकी मृत्यु के पश्चात् भी न भूले, वरन् जाति के लिये वे जीता-जागता धर्म बन गयीं । राजाराम, नीलोमुरेश्वर, प्रह्लाद नोराजी, 🌸 धर्म के लिये मरो, मरते मरते भी शत्रुओं का संहार करो, राज्य प्राप्ति के लिये मर भी जाओ, मरहठों को संगठित करो, राष्ट्र धर्म को बढ़ाओ । अपने इस कर्तव्य से च्युत होने पर पूर्वजों के परिहास पात्र बनोगे—”