भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 3, कुल 254 में से

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प्रकाशकीय A Nation that forgets the glory of itspast, loses the mainstay of its National Character. —Maxmuler ‘जो राष्ट्र अपने प्राचीन गौरव को भुला देता है, वह अपनी राष्ट्रीयता के आधारस्तम्भ को खो बैठता है।’ इसी शाश्वत् सत्य को लेकर यह पुस्तक लिखी गई है। राष्ट्र का इतिहास एक अमूल्य सम्पत्ति है जिसे सुरक्षित रखने में ही देश का मंगल है। ‘हिन्दू- पद-पादशाही’ नाम ही पुस्तक के आशय को प्रकट कर देता है। हिन्दवी राज्य के स्थापन करने का जो सफल प्रयत्न सतरहवीं, अठारहवीं शताब्दी में किया गया, उसी का यह चित्रण है। ✕ ✕ ✕ कालेपानी की नारकीय यातना सहन करने के बाद जब स्वा- तन्त्र्य-वीर सावरकर जी रत्नगिरि जिले में नजरबन्द थे, उस समय उन्होंने यह पुस्तक लिखी। पंजाब-केसरी स्व० लाला लाजपतराय जी, ‘इंडियन एजुकेटर’ मदुरा तथा ‘इंडियन हिस्टारिकल कल्चर’ ने इस पुस्तक की मुक्त-कंठ से प्रशंसा की है। आज हिन्दू-राष्ट्र के सामने जो काली घटाएं छाई हैं, उनको दूर कर स्वतन्त्रता के सूर्य को फिर से देदीप्यमान करने के लिये जिन घटनाओं का सिंहावलोकन करने की आवश्यकता है, वह इस पुस्तक में है। आशा है यह पुस्तक अपने उद्देश्य को पूरा करेगी ! ✕ ✕ ✕ यह पुस्तक श्री सावरकर जी की विशेष आज्ञा से प्रकाशित हो रही है, अतः मैं उनका हार्दिक धन्यवाद करता हूँ। —विश्वनाथ एम. ए. ────────────────────────── मुद्रक—श्री विश्वनाथ एम० ए०, आर्य प्रैस लिमिटेड, लाहौर प्रकाशक—म० राजपाल एण्ड सन्ज, अनारकली, लाहौर।

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