भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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लेखक के दो शब्द • ज्यों ज्यों समय बीतता जाता है प्राचीन इतिहास की सत्यता की परख करना कठिन हो जाता है, परन्तु श्रीयुत् राजवाड़े आदि विद्वानों के सतत् प्रयत्नों से महाराष्ट्र का इतिहास आज पर्याप्त रूप से स्पष्ट हो गया है । इससे पहले तो हमें अपने इतिहास की जानकारी के लिए केवल विदेशी इतिहासकारों की खोज पर ही आश्रित रहना पड़ता था । नई खोज के बहुत से काग़ज़-पत्रों और शाही दस्तावेजों के मराठी में होने के कारण श्रीयुत् जस्टिस रानाडे के अतिरिक्त किसी भी और विद्वान् ने महाराष्ट्र के इतिहास को ऐसी भाषा में लिखने का यत्न नहीं किया जिससे भारतवर्ष की जनता अथवा सारा संसार महाराष्ट्र के राष्ट्रीय आंदोलन के महत्त्व को समझ सकता । मेरे दिल में बड़ी देर से यह इच्छा थी कि लोगों के सामने एक ऐसी पुस्तक रखी जाय जिससे महाराष्ट्र के इस महान् आंदोलन का और क्रांति के संदेश का कुछ थोड़ा बहुत ज्ञान हो सके । सन् १६१० में, सिखों के इतिहास को लिखने के बाद, जो कि शुरू में क्रांति के आन्दोलन के थपेड़ों में ही कहीं नष्ट भ्रष्ट हो गया, मैने मराठों के इतिहास को अंग्रेजी में लिखना शुरू किया । परन्तु उस समय कुछ ऐसे आवश्यक कर्तव्य आ पड़े जिनके कारण जीवन के बहुत से दिन अन्डमान की निर्जन काल-कोठरियों में मृत्यु और अन्धकार से मुठभेड़ में बीत गए और इस साधना को पूरा करने की आशा भी जाती रही । अन्ततः ईश्वर को यह मन्जूर था कि मैं पुनः इस काम को हाथ में लूं और अपने महान् पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पण करूं जिन्होंने कि सत्राहवीं और अठारहवीं शताब्दी में बड़ी वीरता से अपनी आन और हिन्दू-राष्ट्र की स्वतन्त्रता की रक्षा की । मैं कारागार से मुक्त हुआ और इस पुस्तक को लिखा । किसी भी प्रान्तीय जागृति की, महत्ता की छाप हिन्दू-राष्ट्र के

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