हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
पृष्ठ 36, कुल 254 में से
संदर्भ में पढ़ेंहुए थे। अतः स्वामी रामदास जी के कथनानुसार गंगा और यमुना का जल अब भी अपवित्र तथा पूजन कार्य के अयोग्य था, क्योंकि उन पर मुसलमान राजाओं की धार्मिक ध्वजा की छाया अभी तक पड़ती थी और इसीको देखकर स्वामीजी बड़े दुःख भरे शब्दों में कहा करते थे कि — "मुसलमान शक्तिशाली हैं और हिन्दू निर्बल हैं" किन्तु मरहठों को चाहिये कि "धर्म के लिये मरें, मरते-मरते भी अपना राज्य ले लें और महाराष्ट्र साम्राज्य स्थापित करें और हिन्दू धर्म को जीवित करें।" क्या मुसलमानों का अन्यायपूर्ण शासन भारतवर्ष से उठ गया था ? क्या भारतवासियों के पांवों में पड़ी हुई गुलामी की जंजीरें कट गई थीं ? नहीं। जब तक मुसलमानों का प्रभुत्व सारे भारतवर्ष में चूर-चूर न हो जाता, तब तक हिन्दूधर्म के साम्राज्य का गौरव नहीं हो सकता। जब तक भारतवर्ष की एक इंच भूमि भी मुसलमानों के अधिकार में रहेगी, तब तक जिस कार्य के लिये शिवाजी तथा रामदासजी के वंशज मर मिटे थे, वह कार्य अधूरा ही समझा जायगा। विचारवान और कर्मशील मरहठा नेताओं, योद्धाओं और ऋषियों ने जनता के सामने ये युक्तियां रखीं—"जब कि तुमने अपने मन में दृढ़ संकल्प कर लिया है कि जब तक हिन्दुओं की गुलामी की बेड़ी टुकड़े २ नहीं कर डालते तब तक अपनी तलवार को म्यान में न रखेंगे, तब जब तक कि हिन्दू जाति बिना रोकटोक पूर्ण स्वतन्त्रता से अपने सारे धार्मिक कार्य नहीं कर सकती और जब तक एक विशाल शक्तिशाली हिन्दू राज्य स्थापित नहीं हो जाता तब तक तुम युद्ध बन्द करके कैसे शान्तिपूर्वक राज्यसुख को भोग सकते हो ? जब तक विश्वनाथ के पवित्र मन्दिर की जगह मसजिद दिखाई देती है, जब तक मुसलमानों के घुड़- सवार बेरोक टोक सिन्धु नदी को पार करते रहेंगे और जब तक उनके जहाजों की पालें हिन्द महासागर में उड़ती रहेंगी; तब तक क्या तुम इस धर्मयुद्ध से कभी भी मुंह मोड़ सकते हो ? इस धर्मयुद्ध का अंत