भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 254 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 62

[ ६२ ]

किया और रेवास के समीप एवेसीनियों की सेना पर शानदार विजय प्राप्त की और उनके नेता का, जो कि कोंकण के हिन्दुओं का पक्का वैरी था और जिसने परशु राम के मन्दिर को मिट्टी में मिला दिया था, वध किया गया। इस प्रकार उसे अपने अपराधों का दण्ड अपना जीवन देकर पूरा करना पड़ा। उसी दिन उसके साथ ही उन्देरी का मुस्लिम सेनापति और ११००० सैनिक भी लड़ते हुए मारे गए। सारे कोंकण निवासियों तथा महाराष्ट्रीयों ने अपने वीर विजेता को, जिसने कि हिन्दू धर्म के दुश्मनों से बदला लेकर उनको नष्ट भ्रष्ट कर दिया था और हिन्दू जाति के मान की रक्षा की थी, हार्दिक आशी- र्वाद दी। स्वयं राजा भी बहुत प्रसन्न हुआ और उसने उसे लिख भेजा—"सत-सिद्दी रावण के समान ही एक भयंकर राक्षस था। उस का वध करके तुमने सिद्दियों को समूल नष्ट कर दिया है। आप की सब जगह ख्याति हुई है।" शाहू जी ने उस नवयुवक सेनापति को अपने दरबार में बुला कर उसका बहुमूल्य उपहारों तथा वस्त्रों से सम्मान किया। और ब्रह्मेन्द्र स्वामी, जो कि इस मरहटों के युद्ध के मुख्य प्रोत्साहक थे, जिन्होंने मरहटों को कभी हतोत्साहित नहीं होने दिया था, और जो जब कभी वे परस्पर की कलह अथवा स्पर्धा के कारण अपने कर्तव्य से ढील दिखलाने लगते तभी वे उन्हें हिन्दुओं की स्व- तन्त्रता के युद्ध के आध्यात्मिक तथा धार्मिक पहलू पर जोर देकर, उन्हें अपने देश और धर्म के प्रति कर्तव्य का स्मरण कराते रहते थे—उनको अपनी भावनाओं के अनुसार परमात्मा अथवा अपने प्रिय शिष्य का धन्यवाद करने के लिये कोई उपयुक्त शब्द ही नहीं मिलते थे। इस प्रकार अन्ततः स्वामी जी ने परशुराम के पवित्र स्थान को स्वतन्त्र कराने तथा धर्म की रक्षा करने में सफलता प्राप्त कर ही ली। शामलांची क्षिति केलो, कोकणांत धर्म राखिला। ॐ