हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशक्ति पूर्णतया नष्ट हो जायगी। उसी समय नादिरशाह के आक्रमण का समाचार पहुँचा। यह भारत के लिए सबसे बड़ा भारी खतरा था। मरहठे ही हिन्दुओं की एकमात्र शक्ति थी जो उसका मुकाबला कर सकती थी। अतः अब उनके सामने यह एक और आपत्ति आ पड़ी। इस आक्रमण ने पुर्तगेज़ों के जीवन की अवधि कुछ और बढ़ा दी। बाजीराओ इस परिस्थिति को ताड़ गए और उन्होंने लिख भेजा—"पुर्तगेज़ों के साथ युद्ध तो शून्य के समान ही है। भारत में अब हमारा एक ही दुश्मन है। इसलिए सारे भारत को संगठित हो जाना चाहिये। मैं अपनी मरहठा सेना को नर्मदा से लेकर चम्बल तक फैला दूंगा और फिर देखूँगा कि किस तरह नादिरशाह दक्षिण की ओर बढ़ने का साहस करता है।" अतः उसने दिल्ली, जयपुर और अन्य उत्तरी राज्यों के दर्बारों में स्थित मरहठा प्रतिनिधियों को आज्ञा दी कि आप लोग केवल मरहठों का ही नहीं अपितु राजपूतों, बुंदेलों और मरहठों सब का एक सम्मिलित संगठन करो। आजकल उस समय के मरहठा नीतिज्ञ का एक छपा हुआ पत्र मिलता है जिसे पढ़कर यह पता लगता है कि किस प्रकार हिन्दुओं ने मुगल सम्राट् को गद्दी से उतार कर उसके स्थान पर उदय- पुर के महाराणा को भारत के शासन पर बिठा देने की आयोजना की थी। मराठा नेता, बाजीराओ का उत्सुक हृदय हिन्दुओं की विस्तृत विजयों की विस्तृत आयोजनाएं कर रहा था। उसके पास इतने द्रव्य-साधन थे कि वह जहां एक ओर वसीन को घेरने और पुर्तगेज़ों के साथ लड़ने के लिए फौज भेज सकता था वहां दूसरी ओर उसके पास नादिरशाह को मार भगाने के लिए भी असंख्य सेना थी। अतः पुर्तगेज़ों को शीघ्र ही पता लग गया कि नादिर शाह के आक्रमण के कारण भी उनके घेरे में कोई दुर्बलता नहीं आ सकी।