भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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कर लिया था। इसके अनुसार ही उन्होंने अपने अभिलाषित वजीर ग़ाज़ीउद्दीन को, १७५४ में, अब्दाली से पंजाब और मुल्तान वापस लेने में सहायता दी थी। यह उसे एक खुली ललकार थी। ठीक उसी समय नजीबखां के षड्यन्त्र ने मुहम्मद अब्दाली को पूर्ण विश्वास दिला दिया कि भारत के मुसलमान और नवाब उनकी मदद करेंगे। तभी से वह हिन्दुस्तान का शाही ताज पाने का स्वप्न देखने लगा और जो सफलता नादिरशाह भी न प्राप्त कर सका था उसे प्राप्त करने को उद्यत हो गया।

मुख्य-मुख्य मरठे सरदारों को दक्खिन में संलग्न समझ कर उसने ८० हज़ार मनुष्यों की फ़ौज लेकर सन् १७५६ में सिन्धु नदी को पार कर पंजाब और दिल्ली को क़रीब २ बिना युद्ध के ले लिया और बादशाह की पदवी धारण कर ली। विजयी पठानों की परम्परानुसार वह क्रोधित भी हुआ और दिल्ली-निवासियों की कुछ घंटों तक क़तल-आम की आज्ञा देकर अपनी शाही ताजपोशी की शान को पूर्ण किया। उन थोड़े ही घंटों के भीतर १८ ००० निरपराध मनुष्यों का निरंकुशता से वध किया गया। तत्पश्चात् वह मुसलमान-धर्म के रक्षक का पद पाने तथा अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिये हिन्दुओं के पवित्र तीर्थ-स्थानों और नगरों को, जिनको मरहटों ने अभी अभी वापिस लिया था, नष्ट करने के लिये रवाना हुआ। सब से पहले मथुरा उनका शिकार बना। लेकिन यह शहीदों की तरह समाप्त हुआ। ५,००० जाटों ने, जब तक उनके शरीर में प्राण रहे, मुसलमानों के इस टिड्डू-दल का बड़ी वीरता- पूर्वक सामना किया। मथुरा पर क्रोध उतारने के बाद, मरहठों को अपमानित करने के लिये वृन्दावन पर चढ़ दौड़ा, पर गोकुलनाथ की रक्षा में एकत्रित सशस्त्र ४,००० नागों ने जिस वीरता से युद्ध करके उसकी अमर विजय की आशा को निराशा में परिणत कर दिया, वह चिरस्मरणीय है। २,००० वैरागी मारे गये, परन्तु उन्होंने अपने गोकुल-