भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 90, कुल 254 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 90

[ ६० ] स्वतन्त्रता तथा हिन्दुओं के धार्मिक कृत्यों को नाश करने वालों का सामना पूर्ण रूप से कर सकती थी, तथा उसके लिये तैयार थी । मुसलिम-जगत् के नेताओं ने अपनी परम्परागत नीति के अनुसार मूर्तिपूजकों तथा काफ़िरों के विरोध के लिये भारत के बाहर से अपने सहधर्मियों के बुलाने का निश्चय किया । इसका मुख्य कारण यह था कि भारतवर्ष के मुसलमान मरहठों का किसी भी प्रकार से सामना नहीं कर सकते थे— न ही युद्ध में, न ही धोखा देने में, न ही चालाकी में, न ही औरंगजेबी मक्कारी में । नजीबखां रुहेला, जिसे मरहठों के नाश से हर प्रकार मे लाभ था, तथा मल्का जमानी, जो किसी समय शाही महल में अग्रगण्य षड्यन्त्र- कारिणी स्त्री थी, और जिसे हिन्दुओं से भिक्षा मांग कर जीवन निर्वाह करना असह्य था, इस भीषण षड्यन्त्र के नेता बने । उन लोगों ने अपने पूर्वजों का, जिन्होंने ऐसे ही डर और आशा में नादिरशाह को बुलाया था, अनुसरण करने का निश्चय किया और गुप्त पत्र-व्यवहार द्वारा अहमदशाह अब्दाली के पास, विधर्मियों पर चढ़ाई करके मुसलिम- राज्य को बचाने की विनीत प्रार्थना लिख भेजी । अहमदशाह ने उनके निमन्त्रण को स्वीकार कर लिया क्योंकि उसमें उसका भी स्वार्थ छिपा हुआ था । हिन्दुस्तान पर विजय प्राप्त करने की उसकी चिर-अभिलाषा थी । पर असली और सब से बड़ा कारण, जिससे वह युद्ध छेड़ना चाहता था, यह था कि मरहठों का प्रताप और तेज तथा राज्य मुल्तान के पास उसकी सीमा तक पहुँच गया था; और इसके बढ़ने का डर इसे प्रतिदिन लगा रहता था । अहमदशाह ने पहले ही मुल्तान और पंजाब को अपने राज्य में मिला लिया था । लेकिन १७५० में थटा, मुल्तान और पंजाब को भीतरी तथा बाहरी आक्रमणों से बचाने तथा वहां शांति-स्थापना का काम मरहठों ने अपने हाथ में लिया था और वहाँ चौथ लगाने का अधिकार भी प्राप्त