भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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पृष्ठ 93

[ ६३ ] बला करना मृत्यु के मुख में पड़ना है, इसलिये मिले हुए को ही सुदृढ़ करने का निश्चय करके लौट पड़ा और दिल्ली पहुँच कर मलका ज़मानी की लड़की से शादी कर ली ताकि वह अपने मुग़ल-शासन के दावे को दृढ़ बना सके । सरहिन्द की रक्षा के लिये १० हज़ार फ़ौज छोड़ कर और अपने लड़के तिमूरशाह को लाहौर का वाइसराय बना कर जितनी जल्दी आया था, उतनी ही जल्दी वापिस लौट गया । मरहठों ने दक्षिण में फँसे होने पर भी जितनी जल्दी हो सका, चलकर अहमदशाह का बना बनाया सारा काम बिगाड़ दिया। सखाराम भगवन्त, गंगाधर, यशवन्त और दूसरे मरहठे-सेनापति द्वाबा में जा पहुँचे और विप्लव मचाने वाले रुहेलों और पठानों को नीचा दिखाया । इस प्रका र ही गाज़ीउद्दीन की जान बचाई । विट्ठल शिवदेव दिल्ली को रवाना हुआ और १५ दिन की घमासान लड़ाई के पश्चात् पठान-क़ौम के जन्मदाता और मरहठों के कट्टर शत्रु नजीबखां को जीवित ही पकड़ कर दिल्ली पर अधिकार कर लिया । वहां से मरहठी-सेना अब्दाली की लगभग १०,००० फ़ौज का सामना करने के लिये, जो कि अब्दुल समद की अध्यक्षता में सरहिन्द में पड़ी थी, चल पड़ी। फ़ौज को हरा कर अब्दुल समद को बन्दी कर लिया। अब सेना ने लाहौर की ओर बढ़ने का निश्चय किया । पर मरहठों की इस सफलता से अब्दाली का पुत्र वाइसराय तैमूर, जिसने पंजाब और मुल्तान अपने अधीन कर रक्खा था, ऐसा डरा कि उसे मरहठों का सामना करने का साहस ही न हुआ और लाहौर से भाग गया । रघुनाथराव ने बड़ी धूमधाम से लाहौर में प्रवेश किया । जहानखां और तैमूर ने बड़ी चालाकी से परपा होने का उद्योग किया, पर मरहठों ने उनका ऐसा पीछा किया कि उनका हटना हार में परिवर्तित हो गया और सारी सेना, पुत्र और वाइसराय, जो मरहठों को कुचलने आये थे, अपनी सारी वस्तुओं को, जोकि जान की अपेक्षा कम मूल्यवान थीं, छोड़ कर भाग निकले । उनके खेमे लूट लिये गये और बहुत बड़ी तादाद में सामान और नक़द रुपये हाथ लगे । इस