हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)
Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary
गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१० • • हित चौरासी श्री हरिवंश चरण विश्राम। साधन आराधन पुरुषारथ श्री हरिवंश चरन सुख धाम।। सीतल रसद विसद गुन गन मय श्री हरिवंश भजन निहिकाम। श्री हरिवंश सेइवौ स्वारथ सुधा विमल वानी अभिराम।। जो चाहै वृन्दाविपिन माधुरी श्री हरिवंश सुमिर वरनाम। श्री हरिवंश रति कियें नागरीदास सदा सुगम सुख स्याम स्याम।।३।। श्रीध्रुवदास जी प्रगट प्रेम कौ रूप धरि, श्री हरिवंश उदार। श्रीराधावल्लभ लाल कौ, प्रगट कियौ रस सार।।१।। करुणानिधि अरु कृपानिधि, श्रीहरिवंश उदार। वृन्दावन रस कहन कौं, प्रगट धर्यौ अवतार।।२।। प्रथम नाम हरिवंश हित, रटि रसना दिन रैन। प्रीति रीति तब पाइयै, अरु वृन्दावन ऐन।।३।। हरिवंश चरण उर धरनि धरि, मन बच करि विश्वास। कुँवरि कृपा ह्वै है तबहि, अरु वृन्दावन वास।।४।। अगम तें अगम अगाध अति, पहुँचत नहिं मन वेद, श्री हरिवंश प्रताप बल, पावत सुगम सुभेद।।५।। श्री कल्याण पुजारी जी जाके सिर ऊपर श्री व्यासनन्द से धनी हैं ताहि न परवाह कछू काहू और ठौर की। चलत सु पथ साधु लक्षन तें जानियत वानी मुख कहत रसिक सिरमौर की।। श्रवन सुनत नैन देखत हैं रूप मन ध्यावत स्वरूप शोभा-सिन्धु में झकोर की। सदाई कल्याण रस फूले फिरैं प्रेमी जन गुनन गम्भीर धीर मिटी सब रौर की।।१।।