हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)
Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary
गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा
पृष्ठ 123, कुल 275 में से
संदर्भ में पढ़ें११८ • • हित चौरासी (२) ललितादिक- निकुञ्जेश्वरी श्रीराधा की अनन्त दासियाँ और सहेलियाँ हैं। वे सब अपने अपने भावानुसार अनुराग पूर्वक युगल किशोर की सेवायें करती रहती हैं। इन सब सखियों की कुछ यूथेश्वरियाँ हैं, इन यूथेश्वरियों की प्रधान ये आठ ललितादिक सखियाँ हैं। ये आठों युगल सरकार की अति आत्मीय हैं। इनके नाम क्रमशः ललिता, विशाखा, रङ्ग देवी, चम्पक लता, चित्र लेखा, इन्दु लेखा, तुङ्ग विद्या और सुदेवी हैं। इन आठों में पारस्परिक कोई तारतम्य भेद नहीं है। ये छाया की भाँति युगल की नित्य सङ्गिनी हैं। ये आठों हित-प्रेम की मूर्त्ति हैं अतः निरन्तर आनन्द की ही वृद्धि करती रहती हैं। इनके मन, प्राण, आत्मा और इन्द्रियाँ सभी प्रेम से ओत प्रोत हैं। ये सभी उज्ज्वल, रोचक और श्रेष्ठ वस्त्राभूषण धारण करतीं हैं जो उनकी अपनी रुचि के किन्तु भिन्न भिन्न हैं। सबका सौन्दर्य अवर्णनीय है-अतुल है। इनमें से प्रत्येक की सेवा, वेश भूषा, और दक्षता, रूप वर्ण और रुचि क्रमशः इस प्रकार है- (१) ललिताजी- प्रेम की समस्त युक्तियाँ (घातें) जानतीं अतः रस विलास प्रक्रिया की पण्डिता हैं। ये रुचिर ताम्बूल बीड़ियों की रचना करके युगल सरकार को खिलाया करती हैं। अपने मुख से वही बात कहती हैं जो दोनों में रुचि और प्रेम की वृद्धि करने वाली हो। इनकी शरीर आभा गोरोचन जैसी है और मयूर पिच्छ के भाँति की सारी धारण करती हैं। (२) विशाखाजी- श्रीललिताजी की ही तरह विशाखा जी भी युगल का अत्यन्त प्यारी हैं। ये भी सदा ही युगल के साथ रहती और उनकी रुचि के अनुसार उन्हें नवीन, उज्ज्वल, सुकोमल और मनोहर वस्त्रधारण कराती रहती हैं। सदा श्रीप्रियाजी की रुचि की बातें करती रहती हैं। इनकी तनद्युति शत शत दामिनियों की तरह है एवं तारा मण्डल जैसे इनके वस्त्र हैं।