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हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary

गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा

DevanagariHindipublished275 पृष्ठ

पृष्ठ 124, कुल 275 में से

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पृष्ठ 124

हित चौरासी • • ११६ (३) रङ्गदेवी जी- सर्वदा अपना नाम सार्थक करती हुई आनन्द रङ्ग की ही वृद्धि करती रहती हैं। युगल सरकार को भूषण धारण कराना और उनकी सुव्यवस्था पूर्वक रचनायें करना इन्हीं का कार्य है। इनमें चित्र लेखन की भी बड़ी शक्ति है। इनकी शरीर कान्ति कमल किअल्क जैसी है और ये सारी पहिनती हैं जपा कुसुम के रङ्ग की। (४) चम्पकलताजी- पाक कला में अत्यन्त निपुण हैं। अनेकों प्रकार के नवीन नवीन और सुस्वादु व्यञ्जन बना बनाकर सदैव युगल को सन्तुष्ट करती रहती हैं। ये यथानाम गौराङ्गी हैं और इन्हें श्रीप्रियाजी ने प्रसन्न होकर अपना दिव्य नीलाम्बर दे रखा है वही इनके श्रीवपु की शोभा वृद्धि करता रहता है। (५) चित्रलेखाजी- युगल सरकार की बड़ी प्यारी हैं। ये उन्हें सुगन्धित जल अर्पण करतीं और विविध प्रकार के आसव तैयार करती हैं, साथ ही चित्र लेखन एवं शृङ्गार रचना की कला में भी ये अत्यन्त निपुण हैं। इनका वर्ण केशर का सा है और ये स्वर्ण प्रभा जैसे वस्त्र धारण करती हैं। (६) इन्दुलेखाजी-कोक कला की समस्त क्रियाओं में परम विदग्ध हैं। काम कहानियों की तत्काल ही सरस रचनायें करना तो केवल यही जानती हैं। इसके सिवाय प्रेम मंत्र, वशीकरण, सम्मोहन आदि यन्त्र तन्त्र सभी कुछ जानती हैं। मानादि के अवसर में युगल पर अपने यन्त्र तन्त्रों का प्रयोग भी करती हैं। इन्दुलेखाजी श्रीलालजी को अपने सारे गुण सिखाती रहती हैं इसलिये भी श्रीप्रियाजी को प्यारी हैं। हरताल की तरह इनकी देह प्रभा है और ये दाड़िम पुष्प के रङ्ग के वस्त्र धारण करती हैं। ये युगल के कोष की भी अधिकारिणि हैं। (७) तुङ्गविद्याजी- यथानाम तथा गुण हैं। ये-गान, नृत्य कोक हास शिल्प चित्र रचना, वाद्य आदि सभी विद्याओं में निपुण हैं। गुणों की तो मानो अवधि हैं।