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हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary

गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा

DevanagariHindipublished275 पृष्ठ

पृष्ठ 125, कुल 275 में से

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पृष्ठ 125

१२० • • हित चौरासी मन हरण गौर इनका वर्ण हैं और तदनुरूप पाण्डु वर्ण के ये वस्त्र धारण करती हैं। (८) सुदेवीजी- बड़ी सलोनी हैं। प्रत्येक बात में पूर्ण हैं किसी बात में न्यून नहीं। युगल सरकार का नख शिख श्रृङ्गार करना ही इनकी सेवा है। ये कबरी बन्धन करना और अञ्जन रेख बनाना अच्छा जानती हैं, अतः श्रीप्रियाजी की परम कृपा पात्र हैं। ये अद्भुत रमणीय वर्ण की हैं और सूहे रङ्ग की सारी पहिनती हैं। उक्त आठ निज सखियों में से प्रधान हैं श्रीललिताजी। जो रति विहार के मर्म अवसरों पर भी युगल की सेवा की अधिकारिणि हैं किन्तु कभी कभी उन्हें भी एकान्त रस विहारावसर में लता भवन के रन्ध्रों से ही इस विहार का दर्शन सुख ले सकती हैं, समीप नहीं रह सकतीं। उस समय केवल एक सखी अव्यक्त रूप से युगल सरकार के समीप रहती है जिसका सङ्केत परिचय रुद्रयामल तन्त्र में इस प्रकार है- सुतल्पे शाययित्वाथ सम्वाह्य च पदाम्बुजम्। रहस्य समयं ज्ञात्वा वयस्या वाहिरागतः॥ एका सखी तु श्रीराधा कृपातिभर पूरिता। तदानीमपि सेवार्थं तल्पोपान्ते विराजते॥ अर्थात् “युगल सरकार को सुन्दर शय्या में शयन कराके एवं उनके चरण कमलों का सम्वाहन करके रहस्य समय जानकर सखियाँ बाहर हो गयीं किन्तु वहाँ श्रीराधा की अति कृपा प्रवाह पूरिता एक सखी उस समय भी सेवा के लिये श्रीराधा की शय्या के समीप रही।” रुद्र यामल में वर्णित यह 'एका सखी' कौन है ? इसका परिचय श्रीनाभाजी महाराज अपने भक्त माल में देते हैं- श्रीराधा चरन प्रधान हृदय अति सुदृढ़ उपासी। कुञ्ज केलि दम्पती तहाँ की करत खवासी॥ सर्वसु महाप्रसाद प्रसिद्ध ताके अधिकारी। विधि निषेध नहिं दासि अनन्य उत्कट व्रत धारी॥

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