भारतकोश
हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary

गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा

DevanagariHindipublished275 पृष्ठ

पृष्ठ 176, कुल 275 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 176

१७० • • हित चौरासी ६. कनक—स्वर्ण जैसी देह-द्युति। ७. हीरावलि— हीरों जैसी दन्तपंक्ति। ८. विद्रुम सरस— रस पूर्ण विद्रुम (मूँगा) मणि जैसे लाल-लाल, रस भरे अधर। ९. जलज मनि— उज्ज्वल मोतियों जैसी नख मणियों की छटा-ज्योति। १०. पूरित रस पीयूष जुगल घट— अमृत रस से भरे दो कलश; श्रीप्रियाजी के युगल स्तन कलश, जो रस की राशि हैं। ११. कमल—कमल पुष्प के उपमान कोमल शीतल एवं अरुणिम चरण तल, कर तल। १२. कदलि— कदलि स्तम्भ की भाँति सचिक्कन, रोम रहित, पुष्ट, शीतल, मनोहर एवं सुन्दर जङ्घा। १३. खंजन की जोरी—खञ्जन पक्षी के जैसे युगल चञ्चल, मनोहर नयन। १४. सकल साँज दामनि की—दामों की (मूल्यवान) जिस पर दान लेना न्याय संगत है। उक्त वर्णन में श्रीमुख से लेकर श्रीचरणों तक उपमाओं का यथाक्रम सङ्केत है। १. कहीं-२ दामिनि पाठ हैं किन्तु श्रीप्रेमदासजी ने अपनी टीका में दामनु (द्रव्य अर्थ) किया है और प्रसंगानुसार अधिक उपयुक्त है। — ५२ — अवतरण—इस पद में सर्वेश्वरी स्वामिनि श्रीराधा के अखिल विश्व वन्दित सर्वोपरि रूप की महिमा का वर्णन लक्ष्यार्थ एवं अभूतोपमा से किया गया है। श्रीहित सजनी अपनी सखियों से कह रही हैं—