हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)
Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary
गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०८ • • हित चौरासी (६) "अदभुत ताल मृदंग मनोहर किंकिनि शब्द कराहीं" -हित चौरासी एवं- वलयानां नूपुराणां किङ्किणीनां च योषिताम्। सप्रियाणामभूच्छब्दस्तुमुलो रास मण्डले।। -श्रीमद्भा. १०/३३/६ अर्थात् "रास मण्डल में नृत्य करती हुई गोपियों के कङ्कण नूपुरों एवं किङ्किणियों का तुमुल शब्द होने लगा।" इस रास नृत्य का दर्शन करके देवताओं की सुन्दरियाँ मोहित हो गयीं। आचार्यपाद लिखते हैं- (७) "मोहे मृग धैनु सहित सुर सुंदरि प्रेम मगन पट छूटे। उडगन चकित थकित ससि मण्डल कोटि मदन मन लूटे॥" यही भाव श्रीमद्भागवत में भी- कृष्ण विक्रीडितं वीक्ष्य मुमुहुः खेचर स्त्रियः। कामार्दिताः शशाङ्कश्च सगणो विस्मितोऽभवत्।। -श्रीमद्भां. १०/३३/१९ अर्थात् "श्रीकृष्ण के इस विक्रीड़न को देखकर देवताओं की स्त्रियाँ कामातुरा होकर मोहित हो गयीं और चन्द्रमा भी अपने गणों (उडगण आदि) के सहित चकित हो गया।" रास ने सबको चकित तो कर दिया। और ब्रज बालाओं ने जो सुख लूटा उसका भी वर्णन करते हैं दोनों व्यास नन्दन- (८) अधर पान परिरंभन अति रस आनँद मगन सहेली। यह तो हुआ 'हित चौरासी में अब श्रीमद्भागवत में व्यासनन्दन शुकदेव जी क्या कहते हैं-