हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)
Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary
गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें।। श्रीराधावल्लभो जयति ।। ।। श्रीहरिवंशचन्द्रो जयति ।। श्रीमन्महाप्रभुपाद श्रीहित हरिवंशचन्द्र-प्रशस्ति श्री सेवक जी जै जै श्री हरिवंश व्यास कुल मंडना। रसिक अनन्यनि मुख्य गुरु जन भय खण्डना।। श्री वृन्दावन बास रास रस भूमि जहाँ। क्रीड़त स्यामा स्याम पुलिन मंजुल तहाँ।। पुलिन मंजुल परम पावन त्रिविध तहाँ मारुत बहै। कुञ्ज भवन विचित्र सोभा मदन नित सेवत रहै।। तहाँ सन्तत व्यास नन्दन रहत कलुष विहण्डना। जै जै श्री हरिवंश व्यास कुल मण्डना।।१।। जय जय श्री हरिवंश चन्द्र उदित सदा। द्विज कुल कुमुद प्रकास विपुल सुख सम्पदा।। पर उपकार विचार सुमति जग विस्तरी। करुनासिन्धु कृपालु काल भय सब हरी।। हरी सब कलिकाल की भय कृपा रूप जु वपु धर्यौ। करत जे अनसहन निन्दक तिनहुँ पै अनुग्रह कर्यौ।। निरभिमान निर्वैर निरुपम निष्कलंक जु सर्वदा। जय जय श्री हरिवंश चन्द्र उदित सदा।।२।। जय जय श्री हरिवंश प्रसंशित सब दुनी। सारासार विवेकत कोविद बहु गुनी।। गुप्तरीति आचरण प्रकट सब जग दिये। ज्ञान धर्म व्रत कर्म भक्ति किंकर किये।। भक्ति हित जे सरन आये द्वन्द्व दोष जु सब घटे। कमल कर जिन अभय दीने कर्म बन्धन सब कटे।।