हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)

हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)
नारायण पण्डित द्वारा
स्रोत: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (उद्गम)
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·४७ ] राजपुत्रोंको सौंप देना ११ गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति ते निर्गुणं प्राप्य भवन्ति दोषाः । आस्वाद्यतोयाः प्रभवन्ति नद्यः समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेयाः ॥ ४७ ॥ गुण, बुद्धिमानोंमें मिल जानेसे गुण हो जाते हैं और मूर्खोंमें मिल जानेसे वेही गुण दोष बन जाते हैं. जैसे मीठे जलवाली नदियां समुद्रसे मिलकर खारी बन जाती हैं ॥ ४७ ॥ तदेतेषामस्मत्पुत्राणां नीतिशास्त्रोपदेशाय भवन्तः प्रमाणम् ।' इत्युक्त्वा तस्य विष्णुशर्मणो बहुमानपुरःसरं पुत्रान्समर्पितवान् ॥ इसलिये इन मेरे पुत्रोंको नीतिशास्त्रके उपदेश करनेके लिये आप सब प्रका- रसे समर्थ हैं'—यह कहकर बडे आदरसत्कारसे विष्णुशर्माजीको पुत्र सौंप दिये. इति प्रस्ताविका ।