इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 102, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंहँसने से = काले दाँत वाली तथा काले ओष्ठ वाली।
अतिभाषण से = बकवादी।
वेग की ध्वनि सुनने तथा बोलने से = बहरी।
लिखने से = मूर्ख।
अतिवायु सेवन से = उन्मत्त सन्तान होती है।
ऋतुभक्ति स्त्री उपरोक्त कार्य जिस ऋतु में करेगी उसके १६ दिन अर्थात् उसी मास में गर्भाधान हो जाने से उस कार्य का दोष सन्तान में अवश्य आ जायेगा। इसी लिए इन कर्मों का निषेध किया है।
नोपगच्छेत्प्रमोदोऽपि स्त्रियमार्तवदर्शने।
समानशयने चैव न शयीत तथा सह॥
मनु ४/४०
अर्थ- कामार्त पुरुष भी रजस्वला स्त्री के पास न जावे और उसके साथ बराबर बिठौने पर भी न सोवे।
अश्रीरा तन्पूर्वति रशती पाप्याभ्युगा।
पतिर्यद्द्वधोऽ वाससा स्वमङ्गमभिधत्सते।
ऋग्वेद १०/८५/३०
अर्थ- रजस्वला स्त्री के सेवन, स्पर्श साथ निद्रा आदि से पुरुष और सन्तान श्री रहित और रोगादि से दूषित हो जाते हैं।
रजसाभिलुप्तां नार्यं नरस्य ह्यु पगच्छतः।
प्रज्ञा तेजो बलं चक्षुरायुरचैव प्रहीयते॥
मनु ४/४१
अर्थ- रजस्वला स्त्री के पास जाने वाले पुरुष की प्रज्ञा, तेज, बल, नेत्र तथा आयु नष्ट होती है।
उपरोक्त व्याधि रजस्वलागामी पुरुष को होकर अनेक रोग हो जाते हैं। इसलिये रजस्वला स्त्री के साथ चार दिन तक कभी समागम न करे। रजस्वला स्त्री ठंड से बचकर रहे तथा एकान्त वास करे और चौथे दिन स्नान करके अपने पति या पुत्र का दर्शन
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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