इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 112, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंयह अगले मासिक धर्म तक चलता है, इस पक्ष में गर्भ स्थित नहीं होता। स्त्री को यही शुक्ल और कृष्ण पक्ष हैं। इसका चन्द्रमा के शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष से कोई सम्बन्ध नहीं है।
यह धारणा बिलकुल निर्मूल और भ्रामक है कि चन्द्रमा के शुक्ल पक्ष में गर्भ स्थित होने पर पुत्र तथा कृष्ण पक्ष में गर्भ स्थित होने पर पुत्री की प्राप्ति होती है, यह नितान्त गलत है। इसका गर्भ में पुत्र-पुत्री के होने का कोई सम्बन्ध नहीं, इसमें तो केवल मासिक धर्म की 'सम' विषम' रात्रि ही प्रभावकारी होती है न कि चन्द्रमा के शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष। चन्द्रमा के शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष का बच्चे के विकासोन्मुख होने में तो अवश्य प्रभाव होता है। जिसे हमने आगे अंकित किया है।
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अति सूक्ष्म विचारों का प्रभाव
आपने अति उत्तम सन्तान को प्राप्त करने के सभी साधनों पर विचार कर आचरण किया। आपने एक मास तक उत्तम भोजन लिया, ब्रह्मचर्य का पालन, मासिक धर्म की सावधानियाँ, उत्तम रात्रि, उत्तम तिथि, उत्तम नक्षत्र आदि सब कुछ विचार कर दिन का निश्चय किया। उस दिन आप आनन्दमन, प्रसन्नचित्त, शुद्ध विचारों के साथ गर्भाधान संस्कार के लिये अन्तापुर में प्रवेश कर कार्य में व्यस्त हो जाते हैं। उसी समय आपके समीपस्थ किसी साहूकार के घर पर डकैती पड़ती है। धीय-धीय बन्दूकों के फायर होने लगते हैं। उसकी भयंकर आवाजें आपके कानों तक भी पहुँची और तत्काल आपके मन में यह विचार उठा कि कहीं डकैती पड़ रही है। यदि उस समय वार्यपात होकर गर्भ स्थित हो जाय तो उस गर्भ से उत्पन्न बालक में दयुराज के विचार अवश्य ही प्रवेश कर जायेंगे। उसे कोई रोक नहीं सकेगा।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri