इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 113, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंआपका प्रश्न हो सकता है कि इतने लम्बे समय तक के साधन और उत्तम आचरण के ऊपर इस क्षणिक वातावरण के विचारों का प्रभाव क्योंकर हो जायगा? आचरण विचारों की पवित्रता के लिये ही होता है। आकस्मिक घटना से स्थिर विचारों के विचलित हो जाने से उसके प्रभाव को रोका नहीं जा सकता। यही अति सूक्ष्म विचारों के प्रभाव का कारण है। इसका यह अर्थ नहीं कि हमने जो साधन और उत्तम आचरण को अपनाया वह सब व्यर्थ चला गया? नहीं! ऐसा नहीं होगा, जितना आपने तप किया है उसका फल और उत्तम साधनों का प्रभाव भी बच्चे में अवश्य आर्येगे। यदि वह दस्युराज बनता है तो आदर्श दस्युराज बनेगा।
शुक्राणुओं का उलझा हुआ प्रश्न
बहुत पहले से वैज्ञानिक यह मानते चले आ रहे हैं कि वीर्य के अन्दर लाखों शुक्राणु होते हैं। नई खोज के अनुसार अब यह गिनती ५ - ६ करोड़ तक पहुँच गई है। पैथोलॉजिस्ट ६० मिलियन शुक्राणु मानते हैं। यह सभी वैज्ञानिक स्वीकार करते हैं कि गर्भाधान के समय केवल एक ही शुक्रकीट सक्रिय होता है, और उसी से गर्भ धारण हो जाता है। प्रश्न उठता है कि जब केवल एक ही शुक्रकीट सक्रिय के लिये पर्याप्त उपयोगी होता है, तो प्रकृति ने एक बार के वीर्यपात में ५ - ६ करोड़ शुक्राणु के उपस्थित होने का क्या औचित्य माना है? चिकित्सक यह भी स्वीकार करते हैं कि गर्भाधान के लिये वीर्य में कम से कम ७०% सक्रिय शुक्राणुओं का होना अनिवार्य है।
यदि इससे कम सक्रिय शुक्राणु हैं तो गर्भ स्थिति का होना सम्भव नहीं है।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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