भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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चन्द्रमा, वीर्य और तिथि

सोम नाम ओषधि राजा।

पञ्चदश पर्वास सोम

इव हीयते वर्धते च॥

अर्थ- चन्द्रमा समस्त वनस्पतियों का राजा है। जो १५ दिन तक घटता है और १५ दिन तक बढ़ता है। इसी प्रकार 'सोम' नाम वीर्य का है, और वीर्य शरीर का राजा है। शरीर में वीर्य भी चन्द्र की भाँति घटता और बढ़ता है।

जिस प्रकार आकाश में चन्द्रमा घटता और बढ़ता है, उसी प्रकार पृथ्वी पर समस्त जलाशयों में भी जल चन्द्रमा की कलाओं के साथ घटता और बढ़ता है। इसी प्रकार पुरुष शरीर में वीर्य भी घटता और बढ़ता है। अमावस्या को चन्द्रमा नहीं दीखता तो आप उस दिन देखेंगे समुद्र में तथा कुओं में जल कम होगा। प्रमाण के लिए आप अमावस्या के दिन कुँए में रस्सी डालकर नाप लें और समुद्र किनारे पर छड़ी गाड़ दें आपको स्वयं अनुभव हो जायगा और पुरुष के शरीर में वीर्य भी कम होगा। जिस प्रकार चन्द्रमा बढ़ता जाता है उसी प्रकार जलाशयों में जल और शरीरों में वीर्य बढ़ता जाता है। पूर्णमासी को आकाश में जब चन्द्रमा पूर्ण होता है तो उसी दिन समुद्र, कुओं आदि में पूर्ण जल बढ़ जाता है और समुद्र में तो जल अपनी सीमा के बाहर भी आ जाता है। अब आप पूर्णमासी के दिन उसी रस्सी को उसी कुँए में डालकर नापेंगे तो कुँए में आपको स्वयं अनुभव हो जायगा कि आज जल बढ़ा हुआ है इसी प्रकार समुद्र के किनारे पर गाड़ी हुई छड़ी से ज्ञात हो जायगा कि समुद्र भी पूर्णमासी के दिन अपनी सीमा के बाहर आ जाता है। इसी प्रकार वीर्य भी उस दिन वीर्य कोष से बाहर सारे शरीर में फैल जाता है अमावस्या को वीर्यहीन

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri