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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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होने से और पूर्णमासी को वीर्य सारे शरीर में फैल जाने के कारण यदि वीर्य का क्षय अर्थात् स्त्री समागम करने से क्षय रोग (टीन्बी॰) हो जाती है क्योंकि अमावस्या को वीर्य न्यून होता है इसलिए उस दिन वीर्य क्षय होने से अवश्य ही शरीर में क्षीणता होगी और पूर्णमासी को वीर्य, वीर्य कोष से बाहर निकलकर सारे शरीर में फैल जाता है। इस कारण वीर्य अधिक पात होगा जिससे शरीर के सारे अंगों पर खिचाव पड़ेगा तो शरीर स्वयं क्षीणता को प्राप्त होगा। इसलिए गर्भाधान के लिए कृष्ण और शुक्ल दोनों पक्षों की पंचमी, षष्ठी, सप्तमी और नवमी यह तिथियाँ ही उत्तम हैं।


नक्षत्र और ऋतु

चन्द्रमा पृथ्वी को परिक्रमा करता हुआ जिस- जिस नक्षत्र के सामने आता है उस दिन वही नक्षत्र कहलाता है। गर्भाधान के लिए कुछ उपयुक्त नक्षत्रों की विवेचना करते हैं।

कृतिका नक्षत्र- नक्षत्र प्रायः अनेक तारों के समूह को कहते हैं। कोई नक्षत्र तो केवल एक तारा है, कोई दो तारों का समूह है, कोई तीन का और कोई चार तारों का समूह है। कृतिका नक्षत्र में सबसे अधिक तारों का समूह है। कृतिका नक्षत्र में गर्भाधान करने से बहुत से तारों के साथ सम्बन्ध हो जाता है और तारों का गर्भाधान पर विशेष प्रभाव पड़ता है। कृतिका नक्षत्र का अग्नि तारे के साथ रहना दो बातों को प्रगट करता है। एक तो यह कि दोनों का मिथुन भाव है और गर्भाधान भी मिथुन कृत्य है, दूसरे अग्नि तारे के साथ रहना अर्थात् अग्नि सम्बन्धी कृत्य करना और कराना। गर्भाधान का कृत्य तभी सार्थक होता है जब स्त्री पुरुष दोनों में कामाग्नि प्रज्वलित हो। इसलिए कृतिका नक्षत्र में गर्भाधान करना उचित है।

इच्छा-काम-संतोष Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri