इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 123, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंकन्या और पुत्र भेद रात्रियोंँ
युग्मासु पुत्राजायन्ते स्त्रियोऽयुग्मासु रात्रिषु।
तस्माद्युग्मो सुपुत्रार्थी सविशोदातवेस्त्रियम्॥
मनु ३/४८
अर्थ- (माननीय १० रात्रियों में भी) युग्म ६, ८, १०, १२, १४, और १६ रात्रियों में (गर्भाधान होने से) पुत्र उत्पन्न होता है और अयुग्म ५, ७, ९ और १५ रात्रियों में (गर्भाधान होने से कन्या) उत्पन्न होती है।
इसलिये पुत्र की इच्छा वाले युग्म रात्रियों में और कन्या की इच्छा वाले अयुग्म रात्रियों में स्त्री से समागम करें, और सरलता से समझने के लिए हमारी पुस्तक 'पुत्र प्राप्ति का साधन' देखें।
यह रात्रियाँ मासिक धर्म से आरम्भ होती हैं।
पुमान्पु सोऽधिकं शुक्रेस्त्री भवत्यधिकं स्त्रियाः।
समेऽपुमान्पु स्त्रियां वा क्षीणोऽल्पे च विपर्ययः॥
मनु ३/४९
अर्थ- पुरुष का वीर्य अधिक होने पर पुत्र और स्त्री का रजः अधिक होने पर कन्या और रजः वीर्य दोनों समान हों तो नपुंसक या एक कन्या और एक पुत्र उत्पन्न होता है। वीर्य क्षीण हो अथवा कम हो तो सन्तान नहीं होता।
इंश्वरीय व्यवस्था के अनुसार युग्म रात्रियों में स्त्री का रजः न्यून हो जाता है और अयुग्म रात्रियों में रजः अधिक हो जाता है।
यदि पुरुष का वीर्य इतनी मात्रा में न्यून है कि जो युग्म रात्रि में स्त्री का रजः कम होने पर भी उससे कम है तो ऐसी स्थिति में गर्भाधान करने पर युग्म रात्रि में भी कन्या का ही जन्म
इच्छानुसार सन्तान
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वीरन्द्र गुप्तः
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