इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 122, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंमूल कारण है विपरीत प्रकृति वाले नक्षत्रों में गर्भाधान संस्कार का होना।
जिस दम्पति की इच्छा हो कि हमारे परिवार में सदैव सुख और शान्ति का वातावरण रहे तो उन्हें उचित है कि वह अपने नाम नक्षत्र के अनुकूल प्रकृति वाले ही नक्षत्रों में गर्भाधान संस्कार करें।
नक्षत्र २८ होते हैं। अभिजित नक्षत्र उत्तराषाढ़ के पश्चात् आता है जिसका समय अति न्यून है, इसी कारण उसकी गणना कम होती है। शेष २७ नक्षत्रों के अनुकूल प्रतिकूल प्रकृति के अनुसार तीन भागों में बाँटा गया है। अपने नाम नक्षत्र वाली पत्ति के नक्षत्रों में ही गर्भाधान होने से परिवार में कभी किसी में प्रतिकूलता उत्पन्न नहीं होगा।
| प्रथम पत्ति | द्वितीय पत्ति | तृतीय पत्ति |
|---|---|---|
| १. अश्वनि | १. भरणां | १. कृत्तिका |
| २. मृगशिरा | २. रोहिणां | २. अश्लेषा |
| ३. पुनर्वसु | ३. आद्रा | ३. मघा |
| ४. पुष्य | ४. पूर्वाफाल्गुनी | ४. चित्रा |
| ५. हस्त | ५. उत्तराफाल्गुनी | ५. विशाखा |
| ६. स्वाती | ६. पूर्वाषाढ़ | ६. ज्येष्ठा |
| ७. अनुराधा | ७. उत्तराषाढ़ | ७. मूल |
| ८. श्रवण | ८. पूर्वाभाद्रपद | ८. धनिष्ठा |
| ९. रेवती | ९. उत्तराभाद्रपद | ९. शतभिष |
★★★
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्त:
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri