इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 162, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंबनाया था। उसे पूर्ण विश्वास था कि मेरा पुत्र सिंह से कुश्ती में हारेगा नहीं तभी तो निर्भय, निःसंकोच और दृढ़ता के साथ भरे दरबार में औरंगजेब की ललकार को स्वीकार किया था और विशेषता यह कि घर जाकर पुत्र से सिंह की कुश्ती के बारे में कुछ कहा भी नहीं।
गर्भाधान से लेकर ५ वर्ष की आयु तक बालक पर माता के विचार, धारणा, ध्यान, कार्य चित्रावलोकन आदि सभी बातों का प्रभाव-पड़ता है इसलिए, जिस प्रकार के बच्चे की इच्छा हो उसी प्रकार के चित्र, ग्रन्थ, गाथाओं का अवलोकन तथा मनन गर्भिणी को करना चाहिए और अपनी दिनचर्या भी उसी अनुसार रखनी चाहिए।
गर्भ के लक्षण और वृद्धि
प्रथम मास- यदि स्त्री को मासिक धर्म सम्बन्धी कोई रोग न हो, तो गर्भ धारण के पश्चात् मासिक धर्म नहीं होता। यह गर्भ का प्रथम और निश्चित लक्षण है। अधिकांश स्त्रियों का जी मिचलाता है बार-बार थूकने की इच्छा होती है, मुख से पानी अधिक निकलता है। भूख अधिक लगने लगती है, और चेहरे पर दुर्बलता के चिह्न होते हैं। स्त्रियों के मासिक धर्म का दोष, बन्ध्या दोष या अन्य व्याधि के कारण गर्भ स्थित न होने पर निम्नलिखित औषधि का प्रयोग ३ मास तक निरन्तर कराने से गर्भ सम्बन्धी सभी विकार दूर होकर गर्भ धारण करने की शक्ति प्राप्त होती है। साँठ ३ तोला, शतावर ३ तोला, असगन्ध नागौरी ३ तोला अजवायन ३ तोला, ईसबगोल १।। तोला, मिश्री १२ तोला ईसबगोल को छोड़कर सारी वस्तुओं को कूट छान लें बाद में ईसबगोल साबत ही मिला दें। मात्रा ४ माशा सुबह ४ माशा सायं दूध से
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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