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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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लगता है, पेट की त्वचा पर भुर्रियों पड़ जाती हैं। पेट की त्वचा और रंगों को सही स्थान पर लाने के लिए यह आवश्यक है कि प्रसूतिका को प्रसव के २० दिन पश्चात् टब में कौकड़ की छाल का तैयार किया हुआ गर्म जल भर लें और उसी में २ तोला फिटकरी पीस कर और मिला दें तत्पश्चात् प्रसूतिका की तेल मालिश करके टब में १५-२० मिनट बैठा लें तथा प्रसूतिका पेट को जल में लेटे-लेटे हल्के हाथ से मले जल का गर्म होना अनिवार्य है। इस क्रिया के १५ या २० दिन तक करने से प्रसूतिका का पेट और गर्भ द्वार अपने प्राकृतिक रूप में आ जाते हैं। इससे कमर और शरीर का दर्द, आलस्य आदि सब दूर होकर स्वस्थ हो जाती है। प्रसूतिका को प्रसव के ४ या ५ दिन पश्चात् देवद्वारादि क्वाथ सात दिन तक देना चाहिए इससे प्रसूतिका का ज्वर, वेदना, आलस्य को दूर करके शरीर को निरोगी करता है। इसको उपेक्षा में १ मास तक शरद् ऋतु में दशमूलारिष्ट और ग्रीष्म ऋतु में दशमूला अर्क का प्रयोग कर सकते हैं।

प्रसूतिका की मालिश सरसों के तेल की नित्य १५ या २० दिन तक अवश्य होनी चाहिए और बालक की लोई भी १ वर्ष तक होती रहनी चाहिए (गेहूँ के आटे में सरसों का तेल और पानी मिलाकर बच्चे के मलने को लोई कहते हैं)।

देवद्वारादि क्वाथ

देवद्वार, बघदूध्या, पोखर मूल, पीपल छोटी, सौठ, कायफल, नागर मोथा, चिरायता, कुटकी, धनियाँ, हर्र की बकली, गजपीपल, जवाशा, गोखरु, कटैली की जड़, अतीस, गिलोय, काकड़ा सिंगी, काला जीरा।

सारी वस्तुएँ समान भाग लेकर दरदरा कट लें। मात्रा २॥ तोला लेकर आधा सेर जल में पका कर, जब जल १ छटीक रह जाय तो छान कर पिला दें।

प्रसूतिका को 'सौभाग्य सौंठी' का सेवन कराना चाहिये। ★★★

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri