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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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प्रसूतिका का पेट बढ़ जाने पर

प्रसव के २० दिन पश्चात् पीपला मूल का चूर्ण २ माशा प्रातःकाल दूध से लेने पर बढ़ा हुआ पेट ठीक हो जायेगा। एक मास तक सेवन करें।


शिशु पालन

जिस देश के शिशुओं की देखभाल दिनचर्या पर पूर्ण ध्यान दिया जाता है वह देश स्वस्थ, निरोगी और बलिष्ठ होता है।

नवजात शिशु का शरीर अत्यन्त कोमल होता है। इसलिये उसकी रक्षा के लिये अत्यन्त सावधानी की आवश्यकता है। प्रसुता स्वयं दुर्बल होती है, वह भली प्रकार बालक की देखभाल नहीं कर सकती और न सारा भार उसके ऊपर ही छोड़ना चाहिए। प्रसुता के पास चतुर स्त्री को उसकी देखभाल के लिए हर समय उपस्थित रहना चाहिए।

सबसे पहले बालक के शरीर की भली प्रकार सफाई करनी चाहिए। उसके शरीर पर मल चिपका होता है। इस लिये केवल पानी डालने से मल साफ नहीं होता इसलिये बालक के शरीर को हल्के हाथ से मल को साफ करना चाहिये। बालक को स्नान के समय हवा नहीं लगनी चाहिए, स्नान बन्द कमरे में हल्के गर्म जल से कराना चाहिए। शरीर पोछ कर ऋतु अनुसार वस्त्र पहनायें।

बालक का पेट साफ रखना आवश्यक है इसके लिए जन्म घड़ी पका कर रख लेनी चाहिए इसको गर्म करके देने से बच्चे को दस्त होकर पेट साफ हो जाता है और यदि ठन्डा ही

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri