इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंऔर माता पुत्र के प्रेम को पुनः प्राप्त करेगी।
यह मनोवैज्ञानिक बात है यदि इस पर पूर्ण विवेचना के साथ मनन किया जाय तो माता पुत्र, सास बहु का क्लेश समाप्त होकर सुख और शान्ति का जीवन व्यतीत होने लगे। माता को पुत्र वधू पर अपने प्रेम द्वारा इतना प्रभाव डालना चाहिये कि वह सास को अपनी माता ही समझने लगे। बालक माता से ही अपनी सारी व्यथा कह सकता है अन्य से नहीं। इसलिये पुत्र वधू और अपनी पुत्री को माता एक ही समान समझे।
सास भली, निज कन्या-पुत्र वधू को करती है सम प्यार। सास-बुरी, कर वधू अनाहत, करती कन्या का सत्कार।।
यं माता पितरौ क्लेश सहेते सम्भवे नृणाम्।। न तस्यनिष्कृतिःशक्या कर्तुं वर्षशतैरपि।।
मनु २/२२७
अर्थ- मनुष्यों की उत्पत्ति और पालन में जो क्लेश माता पिता सहते हैं उस क्लेश का बदला सौ वर्ष में भी नहीं हो सकता।
तयोर्नित्यं प्रियं कुर्यादाचार्यस्य च सर्वदा।
तेष्वेव त्रिषु तुष्टेषु तपः सर्वं समाप्यते।।
मनु २/२२८
अर्थ- माता-पिता और गुरु का सर्व कार्य में नित्य प्रिय करे। इन तीनों की ही प्रसन्नता होने पर सम्पूर्ण तप पूरा होता है।
यावत्त्रयस्ते जीवेषुस्तावन्नानांन्यं समाचदेत।
तेष्वेव नित्यं शुश्रूषां कुर्यात्प्रियहिते रतः।।
मनु २/२३५
अर्थ- इस कारण उनकी प्रीति और हित में परायण होता हुआ जब तक वे जीवें तब तक चाहे और कुछ न करे, किन्तु उनकी नित्य शुश्रूषा करे।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri