भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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आकाशशास्त्रविज्ञो

बालवृद्धकृशातुरा।

प्राता ज्येष्ठः समः पित्रा भार्या पुत्राःस्वकान्तुः॥

मनु ४/१८४

अर्थ- बालक, वृद्ध, कृश, आतुर ये आकाश के स्वामी (निराधार) हैं और ज्येष्ठ प्राता पिता के तुल्य है। भार्या और पुत्र अपने शरीर के तुल्य हैं। इससे विवाद करना उचित नहीं।

देवतातिथिभृत्यानां पितृणामात्मनश्च यः।

न निर्वपति पञ्चानामुक्छवसन्न स जीवति।

मनु ३/७२

अर्थ- देवता, अतिथि, भृत्य, माता-पिता आदि और आत्मा इन पाँचों को अन्न न दे तो जीता हुआ भी मरे के तुल्य है।

देवता का अन्न यज्ञ और वलिवैश्य अर्थात् यज्ञ करना और अन्न की दस आहुति देना। अतिथि सत्कार, माता-पिता की शुश्रूषा और भोजन से सत्कार करना, आत्मा का भोजन अन्न तथा वेदादि धर्म ग्रन्थों का स्वाध्याय करना है।

पितेव पालयेत्पुत्रान्न्येष्टो प्रातुन् यवीयसः।

पुत्रवच्चापिवर्तैर्न ज्येष्ठे भ्रातरि धर्मतः॥

मनु ९/१०८

अर्थ- ज्येष्ठ प्राता छोटे भाइयों का पिता पुत्र के समान पालन करे और छोटे भाई भी बड़े भाई को धर्म से पिता के समान मानें।

लालयेत् पञ्च वर्षाणि दशवर्षाणि ताडयेत्।

प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रे मित्रवदाचरेत्॥

षाणवयनीति ३/१८

अर्थ- पुत्र को पाँच वर्ष की आयु तक प्यार करे, फिर दस वर्ष तक ताड़ना करे अर्थात् १५ वर्ष तक और सोलहवर्षे वर्ष की प्राप्ति होने पर उसके साथ मित्र के समान आचरण करे।

हृच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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