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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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४२-जामुन की गुठली १ तोला, सौठ १ तोला, गुडमार बूँटी २ तोला, सबका बारीक घूर्ण करके कुहमार पाठा के गूदे में घोटकर बेर की बराबर गोली बनाकर छाया में सुखा लो। १ गोली प्रातः १ सायं गौ दूध में शहद मिला कर लेने से मधुमेह (शकर) रोग के लिये उत्तम है।

४३-प्रायः बच्चों को सुखा रोग हो जाता है। यह रोग एक बच्चे से दूसरे बच्चे को भी लग जाता है। इसके लिये निम्नलिखित तेल का मरदन करना उत्तम है।

शुद्ध सरसों का तेल आधा सेर, आँगा जिसे कुत्ता या अपामार्ग कहते हैं लम्बी शाख वाली जिस पर चावल से लगे होते हैं। उसकी जड़ २ तोला, सिन्दूर असली ४ रत्ती। इन सबको लोहे की कढ़ाई में डालकर रविवार या मंगलवार के दिन तेज धूप में मन्द-मन्द अग्नि पर पकायें। ध्यान रहे पकते समय किसी की छाया न पड़े। जब सब जलकर काला हो जाये तो ठण्डा कर छान लें। और शीशी में भर कर रख लें। तेल तैयार हो गया।

प्रयोग विधिः- यह तेल पहले बच्चे के कान के पीछे मलें, बाद में हाथ की हथेली पर, पैर के तलबे पर, सिर के काग पर, रीढ़ की हड्डी पर मलने के पश्चात् सारे शरीर पर हल्के-हल्के मलें। शरद् ऋतु में धूप में बैठ कर मलें और ग्रीष्म में छाया में मलें। इस क्रम से नित्य तेल मरदन से एक मास में ही बच्चा स्वस्थ होने लगेगा।

४४-गाय का ताजा गोबर लगभग २ तोले बच्चे की कमर पर मलने से कुछ देर पश्चात् बच्चे की कमर पर बारीक-बारीक काले रंग के कीटाणु निकल आर्येंगे इन्हें स्पीट के फोहे से शीघ्रता से साफ कर देना चाहिए। यही सुखा रोग के कीटाणु होते हैं। ध्यान रहे यह कीट किसी अन्य बच्चे को न लग जायें अन्यथा उसे भी सुखा रोग लग जायगा। पीठ पर नित्य

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

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